हरदोई का VDO चला रहा था फर्जी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र का गोरखधंधा — एसटीएफ ने 5 गिरफ्तार 🚨
NBT रिपोर्ट, लखनऊ: हरदोई में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी एक बड़े फर्जीवाड़ा गिरोह का प्रमुख सदस्य था। एसटीएफ ने लखनऊ व गोंडा से गिरोह के ग्राम पंचायत अधिकारी सहित पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
मुक़द्दमा और गिरफ्तारी का सिलसिला 🕵️♂️
एसटीएफ को लगातार सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग फर्जी वेबसाइट, सॉफ़्टवेयर और पोर्टल की मदद से जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर लोगों को दे रहे हैं और उनका उपयोग फर्जी बैनामा/वसीयत आदि में किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने निगरानी कर-करने के बाद कार्यवाही की और शुक्रवार को एक सदस्य को वैगनआर कार से लखनऊ आते हुए पकड़ा गया।
एसटीएफ ने गिरफ्तारियों में बताया कि आरोपी गिरोह सैकड़ों लोगों के फर्जी दस्तावेज बना चुका था और अभी भी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी और उनके कनेक्शन 🔗
एसटीएफ ने दुबग्गा चौराहे के पास से मानसनगर निवासी लाल बिहारी पाल को गिरफ्तार किया — जिसने स्वीकार किया कि वह हरदोई के अहिरौरी इलाके में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर कार्यरत था और फर्जी दस्तावेज बनाने का काम करवा रहा था।
लाल बिहारी पाल की निशानदेही पर गिरफ्तार किए गए अन्य नाम:
- रवि वर्मा (गोडा निवासी)
- सोनू वर्मा (रवि के भाई)
- बशराज/वंशलाल वर्मा (पिता/रिश्तेदार)
- सत्यरोहन वर्मा
सूचना में यह भी सामने आया कि गिरोह में पिता व उसके दो बेटे भी शामिल थे — और टीम अन्य सदस्यो की तलाश में सक्रिय है।
ऑपरेशन में बरामद सामान — सबूतों की फ़ेहरिस्त 📦
पकड़े गए आरोपितों के पास से पुलिस ने निम्न सामग्री बरामद की है:
- 5 मोबाइल फोन
- 14 आयुष्मान कार्ड (नक़ली/कस्टमाइज्ड)
- 7 एटीएम कार्ड
- 25 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र
- 5 मृत्यु प्रमाण पत्र
- 27,690 रुपये नकद
- 1 ड्राइविंग लाइसेंस (D/L)
- 1 हार्ड डिस्क (डाटा हेतु)
- 1 वैगनआर कार
एसटीएफ ने मामला साइबर क्राइम शाखा में भी दर्ज कराया है ताकि डिजिटल सबूतों का भी विश्लेषण किया जा सके।
किस तरह बनते थे फर्जी दस्तावेज — तरीका बताया गया 🛠️
गिरफ्तार आरोपितों के बयानों के अनुसार:
- वे फर्जी वेबसाइट और पोर्टल बनाते थे — जिनके लॉगिन आईडी और पासवर्ड गिरोह में साझा किए जाते थे।
- एक सदस्य (रवि वर्मा) ने लॉगिन क्रेडेंशियल्स बनाकर साथियों को दे दीं और वे उसी के जरिए प्रमाण पत्र तैयार करते थे।
- सोनू वर्मा ने गूगल, यूट्यूब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दो वेबसाइटों — dashboarders.in और cscprintpoint.com — जैसा पोर्टल बनाया और इसे होस्ट/क्लाउड डेटाबेस से जोड़ा गया।
- प्रमाण पत्र बनाने की फीस रुपये 600–1,000 प्रति प्रमाण पत्र ली जाती थी।
- राशि यूपीआई के माध्यम से गिरोह के खातों में ट्रांसफर की जाती थी (आम तौर पर पिता/रिश्तेदार के खाते में)।
दावे और सीमा — कितने बन चुके हैं प्रमाण पत्र? 🔢
आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने अब तक लगभग 1,40,000 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और 2,500 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिए थे — जो संख्या चिंताजनक और व्यापक जाल की ओर इशारा करती है।
एसटीएफ ने कहा है कि यह आंकड़ा सत्यापित किया जा रहा है और जिन मामलों में इन दस्तावेज़ों का उपयोग अवैध कार्यों के लिए हुआ है, उनकी भी जांच की जाएगी।
पुलिस की टिप्पणी और आगे की कार्रवाई 👮♀️
पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ शुधांशु शेखर के अनुसार — लगातार सूचना और तकनीकी जांच के बाद गिरोह के तार पकड़े गए। उन्होंने बताया कि यह गिरोह फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग अन्य कूटनीतियों जैसे नक़ली बैनामा व वसीयत में भी कर रहा था।
एसटीएफ ने संबंधित साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई है और अभी बाकी लोगों की पहचान, क्लाउड होस्टिंग रिकॉर्ड व वित्तीय ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है।
मामले की गंभीरता — क्या संदेश है जनता के लिए? ⚠️
यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर कैसे फर्जी दस्तावेज बड़े पैमाने पर बनाए जा सकते हैं और उनका उपयोग वैधानिक प्रक्रियाओं में धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। जनता को ऐसे शंकास्पद संदेशों/ऑफ़रों से सावधान रहने, अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने और किसी भी अनोखी या संदिग्ध सेवा के लिए आधिकारिक चैनलों से सत्यापन करने की सलाह दी जाती है।
