आंदोलन के साथ-साथ सीटेट-टीईटी की तैयारी में जुटे शिक्षक — तैयारी, चुनौती और सुरक्षा की चिंता 📚✊

आंदोलन के साथ-साथ सीटेट-टीईटी की तैयारी में जुटे शिक्षक — तैयारी, चुनौती और सुरक्षा की चिंता 📚✊

जूनियर हाईस्कूल सोंगरा | ब्यूरो रिपोर्ट: टीईटी/सीटेट अनिवार्यता के फैसले के बाद शिक्षक न केवल आंदोलन कर रहे हैं बल्कि व्हाट्सऐप ग्रुप, पुराने पेपर और रात-दिन की मेहनत से सीटेट-टीईटी की तैयारी भी कर रहे हैं।

संक्षेप में: सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्य करने के आदेश के बाद प्रदेश में शिक्षक संघ सक्रिय हैं — आंदोलन तथा कानूनी लड़ाई के साथ कई शिक्षक खुद तैयारी में जुटे हैं ताकि उनकी नौकरी सुरक्षित रहे। कुछ शिक्षक सीटेट और यूपी-टीईटी में से किसी एक को पास करने पर भरोसा कर रहे हैं। ✍️

व्हाट्सएप ग्रुप से सहयोग — पुराने पेपर हल कर तैयारी तेज 🚀

केस-1 — गौरीगंज, अमेठी: शिक्षिका अर्चना मिश्रा बताती हैं कि टेट/सीटेट की तैयारी के लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में तैयारी से जुड़ी जानकारियाँ, नोट्स और सहकर्मियों द्वारा साझा किए गए पुराने प्रश्नपत्र उपलब्ध हैं। शिक्षक मिलकर पुराने पेपर हल कर रहे हैं और रिवीजन कर रहे हैं।

अर्चना कहती हैं कि वे स्कूल से लौटने के बाद शाम 5-6 बजे, रात 9-10 बजे और सुबह एक-एक घंटा पढ़ाई के लिए निकालती हैं — रोज़ाना छोटे से समय में लगातार तैयारी कर रही हैं। 📱🕘

पढ़ाते-पढ़ाते तैयारी मुश्किल — उम्र और जिम्मेदारियाँ बड़ी बाधा 😓

केस-2 — प्राइमरी स्कूल कल्लू पुरवा, निंदूरा (बाराबंकी): हेड मास्टर लक्ष्मी मिश्रा बताती हैं कि 50 साल से ऊपर के शिक्षकों के लिए टीईटी/सीटेट की तैयारी करना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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लक्ष्मी कहती हैं कि वे हेड मास्टर हैं — जिन पर स्कूल के अतिरिक्त काम हैं, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ भी हैं (बेटी इंटर कर रही है), और 1995 में ग्रेजुएशन करने के बाद 30 साल बाद फिर से पढ़ाई करना आसान नहीं। कई बातें भूलने लगते हैं, इसलिए पुराने ज्ञान को ताज़ा करना कठिन हो रहा है।

“कई चीजें दोबारा याद करनी पड़ रही हैं — और समय मिलना भी मुश्किल है।” ⚖️

नीति-प्रभाव, तिथियाँ और संघ की रणनीति 🗓️

सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया है। इसके बाद विभिन्न शिक्षक संगठन दिल्ली कूच और जंतर-मंतर रैलियों की घोषणा कर चुके हैं। हाल में सीबीएसई ने फरवरी में सी-टीईटी (सीटेट) की तिथि भी घोषित की है — जिससे तैयारी पर समयबद्ध दबाव बढ़ गया है।

एक अनुमान के अनुसार प्रदेश के लगभग 1.80 लाख से अधिक शिक्षक टीईटी पास नहीं है — इसलिए आंदोलन के साथ-साथ कई शिक्षक खुद तैयारी में जुट गए हैं।

शिक्षक संघ की माँग और अगले कदम 📣

उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह का कहना है कि शिक्षक को सीटेट और यूपी-टीईटी में से किसी एक को पास करना चाहिए — इसलिए संघ आंदोलन के साथ शिक्षकों से पढ़ाई भी जारी रखने का आग्रह कर रहा है।

टी-एफ-आई (टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया) ने 21 नवंबर को जंतर-मंतर रैली की घोषणा की है। संगठन 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग कर रहा है और 2 नवम्बर को लखनऊ में जिलाध्यक्ष-महामंत्री की बैठक आयोजित कर दिल्ली रैली की तैयारियाँ तेज कर रहा है।

शिक्षकों की प्रतिक्रिया — विरोध के साथ तैयारी भी जारी ✊📖

कई शिक्षक कहते हैं कि निर्णय के खिलाफ वे आंदोलन करेंगे, पर साथ ही इसे चुनौती के रूप में लेकर सीटेट/टीईटी भी पास करेंगे — ताकि नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित हो। कुछ शिक्षक यह भी मानते हैं कि पुराने शिक्षक (2011 से पहले नियुक्त) के लिए कठिनाइयाँ अधिक हैं, इसलिए उन्हें राहत की मांग की जा रही है।

व्हाट्सऐप ग्रुप, शाम-रात की पढ़ाई, पुराने पेपर हल करना और सहकर्मी सहयोग — ये सब इस तैयारी के मुख्य स्तंभ बन गए हैं।

छोटे-छोटे अभ्यास और टाइमटेबल — शिक्षक कैसे कर रहे तैयारी 📝

  • दिनचर्या में रोज़ाना 1-2 छोटी पड़ाव रखें (सुबह/शाम/रात) — लगातार रिवीजन महत्वपूर्ण।
  • व्हाट्सऐप ग्रुप से हर हफ्ते एक-दो पुराने पेपर मिलाकर मिलकर हल करें।
  • हर सप्ताह कमजोर टॉपिक पर फोकस करें — गणित, भाषा और पेडागॉजी पर प्राथमिकता दें।
  • यदि संभव हो तो जिले में कोचिंग-सहयोग या अध्ययन-बैच बनाएं।

निष्कर्ष — विरोध, तैयारी और सुरक्षा का समन्वय 🔄

टीईटी/सीटेट की अनिवार्यता ने शिक्षकों के लिए एक नई चुनौती तो पेश की है, पर साथ ही आंदोलन और तैयारी का बैलेंस बना हुआ है। जहां एक तरफ़ शिक्षक संघ न्यायिक तथा राजनीतिक मार्ग अपना रहे हैं, वहीं व्यक्तिगत स्तर पर शिक्षक व्हाट्सऐप ग्रुप, पुराने पेपर और समय प्रबंधन से परीक्षा की तैयारी कर अपनी नौकरी सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

रिपोर्टिंग: जूनियर हाईस्कूल सोंगरा | खबर संकलन: स्थानीय संवाददाता 📰

लेख में दिए गए कथन स्रोतों के रूप में स्थानीय शिक्षकों और संघों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित हैं।

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