कानपुर के दो सहायक शिक्षकों — उमाकांत और एक अन्य — को सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति-काल के दौरान टीईटी (TET) पास करने को मान्यता देते हुए बहाल किया

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को लाइव करते हुए बर्खास्त शिक्षकों को दी तत्काल बहाली 🏛️

ब्यूरो, नई दिल्ली: कानपुर के दो सहायक शिक्षकों — उमाकांत और एक अन्य — को सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्ति-काल के दौरान टीईटी (TET) पास करने को मान्यता देते हुए बहाल किया।

मुख्य फैसला — सेवारत टीचर ने टीईटी पास किया था तो बर्खास्ती गलत ✍️

शीर्ष न्यायालय की पीठ — प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन — ने उत्तर प्रदेश, कानपुर के भौती स्थित ज्वाला प्रसाद तिवारी जूनियर हाईस्कूल के दो सहायक शिक्षकों की याचिकाएँ स्वीकार कीं। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति-समय पर टीईटी पास न होने के कारण 12 मार्च 2018 को की गई बर्खास्तगी सही नहीं थी, क्योंकि उन दोनों शिक्षकों ने सेवा के दौरान ही टीईटी पास कर लिया था।

निर्णय में कोर्ट ने साफ कहा कि बदलते हुए नियमों और बढ़ाए गए समय (टीईटी पास करने के लिए 31 मार्च 2019 तक का समय था) को ध्यान में रखते हुए, 2011 और 2014 में टीईटी उत्तीर्ण करने को पर्याप्त माना जाना चाहिए — इसलिए बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया। ✅

पृष्ठभूमि और वाद-विवरण 📚

एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को कक्षा 1-8 के शिक्षकों के लिए टीईटी को न्यूनतम योग्यता के रूप में निर्धारित किया था। उत्तर प्रदेश में पहली बार टीईटी 13 नवंबर 2011 को आयोजित हुई — और याचियों में से एक ने 25 नवंबर 2011 को यह परीक्षा पास कर ली। दोनों की नियुक्ति 13 और 17 मार्च 2012 के आसपास हुई और 12 मार्च 2018 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

दोनों शिक्षकों ने उच्च न्यायालय की एकल एवं खंडपीठ की याचिकाएँ ठुकराए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की गुहार लगाई — और शुक्रवार को उसे सफलतापूर्वक चुनौती दी।

कोर्ट के आदेश के प्रभाव और शर्तें ⚖️

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों शिक्षकों को तत्काल बहाल करने का आदेश दिया, पर स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार के पिछड़े वेतन (arrears) के अधिकारी नहीं होंगे। फिर भी बहाली के बाद उनकी नौकरी को पहले से जारी नौकरी की तरह माना जाएगा — जैसे कि वे लगातार सेवा में रहे हों।

महत्वपूर्ण: इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ और एकलपीठ के आदेशों को शीर्ष कोर्ट ने खारिज कर दिया।

देश भर में टीईटी की अनिवार्यता और प्रतिक्रियाएँ 📣

सुप्रीम कोर्ट पहले से ही देश भर के प्राथमिक एवं उच्च-प्राथमिक सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर चुका है। पिछले आदेशों के तहत — जिनमें तीन सितंबर का उल्लेख है — पाँच वर्ष से अधिक के सेवा-काल वाले शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया गया था और टीईटी न उत्तीर्ण करने वालों को सेवानिवृत्त करने के भी निर्देश दिए गए थे।

यह निर्णय शिक्षकों में चिंता और असमंजस्य की वजह बना — कई राज्य सरकारों और शिक्षक संघों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार के लिए याचिकाएँ दाखिल कर रखी हैं और केंद्र ने भी 2011 से पूर्व हुई नियुक्तियों पर टीईटी अनिवार्य करने में सतर्कता दिखाई है। शिक्षक संघ इस विषय पर विरोध-आंदोलन और कानूनी रास्ते दोनों पर सक्रिय हैं।

मामले की टाइमलाइन — संक्षेप में ⏳

  • 23 अगस्त 2010: एनसीटीई ने टीईटी को कक्षा 1-8 के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित किया।
  • 13 नवंबर 2011: उत्तर प्रदेश में पहली बार टीईटी आयोजित।
  • 25 नवम्बर 2011 / 24 मई 2014: दोनों याचियों ने क्रमशः टीईटी पास किया।
  • 13–17 मार्च 2012: दोनों की नियुक्ति और ज्वॉइनिंग।
  • 9 अगस्त 2017: आरटीई की धारा 23 में संशोधन (टीईटी अनिवार्य)।
  • 12 मार्च 2018: दोनों शिक्षकों को बर्खास्त किया गया।
  • 1 मई 2024: हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पहली अपील खारिज की (याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती दी)।
  • आज: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दोनों की तत्काल बहाली का आदेश दिया।

निष्कर्ष — न्याय का संदेश और आगे की चुनौतियाँ 🔍

यह फैसला उन शिक्षकों के लिए एक संकेत है जिन्होंने नियुक्ति के बाद नियमों में बदलाव के कारण परीक्षा पास की — सुप्रीम कोर्ट ने बदले नियमों की तर्ज पर सेवा के दौरान टीईटी पास करने को वैध माना। हालांकि, इस निर्णय से टीईटी की अनिवार्यता, वापस-पड़ने वाले आदेशों और लागू नीतियों पर जारी बहस और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

सरकारी नीतियों, राज्य और केंद्र के रुख और शिक्षक संघों की कार्रवाई पर अब निगाहें टिकेंगी — ताकि ऐसे मामलों में न सिर्फ कानूनी बल्कि नैतिक और प्रशासकीय स्पष्टता भी बनी रहे।

रिपोर्टिंग: ब्यूरो, नई दिल्ली | सं‌शोधित स्रोत: याचिकाएँ और सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश 📰

नोट: लेख में दिए गए सभी तथ्य उसी मूल रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं; किसी भी कानूनी कार्रवाई या दावों के लिए आधिकारिक आदेश देखें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top