योगी ने घोषणा: मुस्तफाबाद का नाम अब कबीरधाम होगा — लखीमपुर से बड़ा ऐतिहासिक फैसला 🏛️✨
जासं, लखीमपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अलीगंज के नजदीक स्थित मुस्तफाबाद का नाम बदलकर कबीरधाम करने की आधिकारिक घोषणा की। समारोह कबीरधाम आश्रम में आयोजित बड़े मेले के अवसर पर किया गया। 🎉
घोषणा और कार्यक्रम का माहौल
मुख्यमंत्री ने कबीरधाम में आयोजित संत क्षमा देव स्मृति समारोह मेले का उद्घाटन किया और वहां मौजूद जन-समूह को संबोधित करते हुए इस नामकरण का ऐलान किया। आयोजन में स्थानीय समाज, धार्मिक संगठनों और विधि-व्यवस्था के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही — माहौल धार्मिक, सांस्कृतिक और उत्सव-प्रधान रहा। 🔔🕊️
योगी के शब्द — पुनरुद्धार और पहचान
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार राज्य के धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले सर्वसाधारण धन का उपयोग कुछ ऐसे कामों में होता था जिन्हें अब बदला जा रहा है — और उन स्थलों की पारंपरिक पहचान वापस लौटाई जा रही है। 🛕🌿
“पहले यही पैसा कब्रिस्तान की चारदीवारी बनाने में लगता था। पिछली सरकारों में अयोध्या को फैजाबाद, प्रयागराज को इलाहाबाद व कबीरधाम को मुस्तफाबाद बनाया गया था। हमने इन स्थलों की पहचान वापस लौटाने का कार्य किया है।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
राजनीतिक तंज और सन्देश
समारोह में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी तंज कसा — बिना किसी का नाम लिये उन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों की ओर इशारा किया। उनका संदेश स्पष्ट था: राज्य सरकार धार्मिक-ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। 🗣️
कबीरधाम का सांस्कृतिक महत्व
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने कबीरदास की वाणी, सत्संग और सनातन परंपराओं के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कबीरदास की शिक्षाएँ आज भी समाज के मार्गदर्शन का स्रोत हैं और इन्हें संजोकर रखना आवश्यक है — यही सोच इस नामकरण के पीछे का सांस्कृतिक आधार भी दिखती है। 📜🎶
स्थानीय प्रतिक्रिया और अपेक्षाएँ
स्थानीय लोगों और धर्म-समाज ने इस घोषणा का स्वागत किया। कई लोगों ने इसे पहचान की लौट और सांस्कृतिक सम्मान का संकेत बताया। वहीं कुछ प्रश्न — प्रशासनिक आदेश, कार्यालयी बदलाव और दस्तावेज़ीकरण से जुड़े— आगे उठने की सम्भावना है, जिनका समाधान संबंधित विभागों द्वारा किया जाएगा। 🏘️🤝
निहितार्थ
इस तरह के नामकरण न केवल नक्शे पर नाम बदलते हैं, बल्कि स्थानीय ज़रूरतों—परंपरा, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रभावित करते हैं। राज्य सरकार का यह कदम उन जगहों की ऐतिहासिक/धार्मिक पहचान को प्रमुखता देने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। 🌍🔁
