हाई कोर्ट का सख्त आदेश: यूपी के प्राइमरी स्कूलों में टीचरों की उपस्थिति सुनिश्चित करें 🏫👩‍🏫


हाई कोर्ट का सख्त आदेश: यूपी के प्राइमरी स्कूलों में टीचरों की उपस्थिति सुनिश्चित करें 🏫👩‍🏫

बांदा: उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव, एसीएस और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति पीके गिरि ने यह आदेश बांदा की एक टीचर इंदिरा देवी की याचिका पर पारित किया है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बच्चों को जरूरी शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

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हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश 📝

  1. डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम:
    सरकार स्कूलों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस की व्यवस्था करे, ताकि स्कूलों में उनकी वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
  2. टास्क फोर्स का गठन:
    जिला और ब्लॉक स्तर पर एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाए, जो नियमित रूप से शिक्षकों की हाजिरी की मॉनिटरिंग करे।
  3. जिला रिपोर्ट:
    बांदा के डीएम और वीएसए से अपने जिले की स्कूलों में शिक्षकों की हाजिरी की रिपोर्ट मांगी गई है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान में डिजिटल अटेंडेंस की व्यवस्था भले ही बनाई गई हो, लेकिन अमली धरातल पर यह लागू नहीं है।


याचिका का विवरण 📄

  • याचिकाकर्ता इंदिरा देवी, कंपोनेंट स्कूल तिंदवारी, बांदा में इंचार्ज हेड मास्टर हैं।
  • वीएसए बांदा ने 30 अगस्त को आदेश जारी किया था कि याचिकाकर्ता स्कूल में गैरमौजूद थीं।
  • टीचर ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी

हाई कोर्ट ने कहा, “टीचर गुरु हैं और उनका स्थान परम ब्रह्मा के समान है।

“गुरूर ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।”


यूपी के स्कूल और शिक्षक: एक नजर 👀

  • 32 लाख प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल
  • 1.48 करोड़ बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते हैं
  • 4.50 लाख शिक्षक कार्यरत हैं

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीचरों की गैरहाजिरी से बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 का उल्लंघन हो रहा है। खासकर गरीब बच्चों का शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि वे प्राइवेट ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते।


हाई कोर्ट का संदेश ✨

हाई कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में टीचरों की गैरहाजिरी के कारण बच्चों की उपस्थिति घटती जा रही है, और इससे उनका शैक्षिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2025 को इस याचिका पर पुनः सुनवाई करने का निर्णय लिया है।



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