⏳ पदोन्नति में देरी: बिना प्रधानाध्यापक बने सेवानिवृत्त होंगे लगभग 50 शिक्षक — शिक्षक संघ की आपत्ति
प्रयागराज (राज्य ब्यूरो)। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापक से सहायक प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापक पदों पर होने वाली पदोन्नति की प्रक्रिया इस वर्ष भी विलंबित है। यदि प्रक्रिया जल्द नहीं शुरू की गई तो करीब 50 ऐसे शिक्षक जो पदोन्नति सूची में हैं, 31 मार्च 2026 तक प्रधानाध्यापक का पद पाए बिना सेवानिवृत्त हो जाएंगे — यह वही शिक्षक हैं जो वर्तमान में पदोन्नति के दायरे में आते हैं। ⚠️
📌 समस्या क्या है?
शिक्षक संघ का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा पदोन्नति प्रक्रियाओं को पूरा करने में बार-बार देरी की जाती है। वर्ष 2024 में भी देरी के कारण कई शिक्षकों को केवल कुछ दिनों के लिए ही प्रधानाध्यापक का पद मिला था — कुल मिलाकर उस वर्ष 200 से अधिक पदों पर पदोन्नति दी गई और पदस्थापन आदेश 28 मार्च 2025 को जारी किए गए थे। उन आदेशों में से 52 शिक्षक ऐसे थे जिन्हें सत्र लाभ के साथ 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त होना था; परिणामस्वरूप वे केवल दो-तीन दिन ही प्रधानाध्यापक बने रह पाए।
👥 शिक्षक संघ की मांगें
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने कहा है कि पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए ताकि सेवानिवृत्ति के नजदीक खड़े अध्यापक समय रहते प्रधानाध्यापक बनकर वेतनवृद्धि और पेंशन के लाभ पा सकें। उनके प्रमुख बिंदु निम्न हैं:
- पदोन्नति प्रक्रिया तुरंत आरंभ की जाए।
- पिछले वर्ष जिन शिक्षकों को पदोन्नति देकर नियुक्ति आदेश जारी किए गए पर उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया, उनकी पदोन्नति नियमों के अनुसार रद की जाए ताकि रिक्त पदों पर अन्य शिक्षकों को अवसर मिल सके।
- पदोन्नति में लगातार देरी रोकी जाए — ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थिति न उत्पन्न हो कि योग्य शिक्षक बिना पद पाए सेवानिवृत्त हो जाएं।
📅 पिछले साल का नज़ारा
वर्ष 2024 में देरी के कारण जिन 52 शिक्षकों को केवल कुछ ही दिनों के लिए प्रधानाध्यापक बनना पड़ा, उन्हें उस अल्प अवधि के लिए वेतनवृद्धि और पेंशन का लाभ मिला। शिक्षक संघ का तर्क है कि यही व्यवस्था यदि नियमानुसार लागू की जाए और अनुचित पदोन्नतियों पर पुनर्विचार किया जाए तो इस बार कई और शिक्षकों का हित सुरक्षित किया जा सकता है। 💼💡
🔔 क्या होगा यदि देरी जारी रही?
अगर पदोन्नति की प्रक्रिया समय पर नहीं शुरू हुई, तो:
- करीब 50 शिक्षक बिना प्रधानाध्यापक पद पाए सेवानिवृत्त होंगे।
- उनको मिलने वाली संभावित वेतनवृद्धि और पेंशन के अवसर छिन सकते हैं।
- शिक्षकीय मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव और विद्यालयों में प्रशासनिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
📢 शिक्षक संघ की चेतावनी और प्रशासन से अनुरोध
रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने शिक्षा निदेशक से आग्रह किया है कि वे शीघ्र कार्रवाई कर न्यायोचित सूचीबद्धता, तैनाती और पदस्थापन आदेश जारी करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो पिछली बार की अनुचित/अपरिपक्व पदोन्नतियों को वापस लेकर योग्य शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए। यह कदम न केवल सरकारी शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी लाएगा। ✊
✅ निष्कर्ष
पदोन्नति में हो रही देरी केवल व्यक्ति विशेष को प्रभावित नहीं कर रही — यह पूरे शैक्षणिक तंत्र और शिक्षक वर्ग के विश्वास पर असर डालती है। तत्काल और पारदर्शी कार्रवाई से न केवल करीब 50 शिक्षकों के हित सुरक्षित किए जा सकते हैं, बल्कि भविष्य में ऐसी अनावश्यक परेशानियों से भी बचा जा सकता है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह शीघ्र ही पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर वरिष्ठता क्रम के शिक्षकों को समय पर पदोन्नत कर दे। 📣
➡️ संदेश: “सीधी और पारदर्शी पदोन्नति — सम्मानित शिक्षक, मजबूस शिक्षा व्यवस्था।” 🎓
