🚨 दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सीरप न दें: केंद्र सरकार की बड़ी चेतावनी 👶❌

🚨 दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सीरप न दें: केंद्र सरकार की बड़ी चेतावनी 👶❌

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में दूषित कफ सीरप से नौ बच्चों की मौत और राजस्थान में भी दो बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने एडवाइजरी जारी करते हुए साफ कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सीरप बिल्कुल भी न दें।


🧪 जांच में क्या निकला?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि मध्य प्रदेश में जांचे गए कफ सीरप के किसी भी सैंपल में खतरनाक रसायन डाईएथिलीन ग्लाइकाल या एथिलीन ग्लाइकाल नहीं पाया गया। ये वही रसायन हैं जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बने हैं।


🩺 DGHS की एडवाइजरी में क्या कहा गया?

DGHS की प्रमुख डॉ. सुनीता शर्मा द्वारा जारी परामर्श में बच्चों को कफ सीरप देने को लेकर कई अहम बिंदु बताए गए हैं –

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  • 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सीरप बिल्कुल न दें।
  • ⚠️ 5 साल से कम उम्र के बच्चों को भी सामान्य तौर पर कफ सीरप नहीं देनी चाहिए।
  • ✅ 5 साल से बड़े बच्चों को दवा देते समय:
    • क्लिनिकल मूल्यांकन अनिवार्य।
    • डॉक्टर की पर्ची के अनुसार सही खुराक।
    • केवल जरूरत पड़ने पर और कम से कम अवधि के लिए दवा।
    • कई दवाओं का एक साथ मिश्रण न करें।

🤧 बच्चों की खांसी पर क्या करें?

  • ज्यादातर बच्चों में तीव्र खांसी अपने आप ठीक हो जाती है।
  • घरेलू देखभाल और डॉक्टर की सलाह ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
  • दवाओं का प्रयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर करें।

✍️ निष्कर्ष

छिंदवाड़ा और राजस्थान की दुखद घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि दवाओं का गलत या बिना निगरानी प्रयोग बच्चों की जान ले सकता है। इसलिए माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए कि किसी भी उम्र के बच्चे को दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

👉 सरकारी कलम की अपील:
बच्चों की खांसी को हल्के में न लें, लेकिन खुद से दवा भी न दें। डॉक्टर से परामर्श ही सबसे सुरक्षित उपाय है। 🙏


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