✍️ समाचार रिपोर्ट (शिक्षक हित में तैयार)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेवा सुरक्षा को लेकर शिक्षक संगठनों में हलचल, अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने के फैसले के बाद देशभर के शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर संकट गहराने लगा है। इसी को लेकर अब बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। शुक्रवार को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर दिल्ली स्थित शिक्षक भवन में राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से “अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा” के गठन की घोषणा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अब देशभर के सभी शिक्षक संगठन एक मंच पर आकर संयुक्त रूप से संघर्ष करेंगे। संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।
👉 प्रमुख निर्णय और रणनीति
- केंद्र सरकार से मांग कि 2017 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) में किए गए संशोधन को निरस्त किया जाए।
- राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी राज्यों का दौरा कर शिक्षकों को आंदोलन के लिए तैयार करेंगे।
- 3 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक जिलास्तर पर सभी शिक्षक सांसदों को ज्ञापन सौंपेंगे।
- सुप्रीम कोर्ट में पहले ही शिक्षक संघ की ओर से याचिका दाखिल की जा चुकी है।
प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता से अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख शिक्षक और देशभर में करीब 98 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। यह केवल शिक्षकों की नौकरी का प्रश्न नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और लाखों परिवारों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ मामला है।
✊ शिक्षकों ने साफ कहा है कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को तेज किया जाएगा और राष्ट्रीय राजधानी में एकजुट होकर अपनी ताकत का अहसास कराया जाएगा।
