उच्च शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त निर्देश: नियुक्तियों में पारदर्शिता, शिक्षकों को मिलेगा सम्मान
📍 लखनऊ।
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया अब और भी पारदर्शी होगी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बृहस्पतिवार को विधान भवन स्थित कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश दिए।
नियुक्ति प्रक्रिया में शासन की भूमिका
👉 अब शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर नियुक्तियों की कमेटी में शासन का प्रतिनिधि भी नामित किया जाएगा।
👉 विश्वविद्यालयों से संबद्ध नए महाविद्यालयों की स्थापना, नए पाठ्यक्रमों की मान्यता और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।
👉 मंत्री ने स्पष्ट कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर का पालन न करने पर संबंधित कुलपति की जिम्मेदारी शासन स्तर पर तय की जाएगी।
शिक्षक पुरस्कार फिर शुरू होंगे 🎖️
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिए जाने वाले शिक्षक पुरस्कार को जल्द ही पुनः शुरू किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मूल्यांकन समिति गठित करने की भी तैयारी है।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा 🏥
बैठक में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव भी तैयार करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में मौजूद रहे
इस महत्वपूर्ण बैठक में विभाग के प्रमुख सचिव एम.पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी, विशेष सचिव गिरजेश त्यागी और निधि श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
✅ संक्षेप में:
- नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनाने पर ज़ोर।
- शासन का प्रतिनिधि रहेगा चयन समिति में।
- नए महाविद्यालयों व पाठ्यक्रमों की मान्यता में कड़ाई।
- शिक्षक पुरस्कार फिर से शुरू होंगे।
- शिक्षकों व कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा।
यह कदम न केवल उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करेंगे बल्कि शिक्षकों और कर्मचारियों को भी सीधा लाभ देंगे। ✍️
