आईआईटी बीएचयू की बड़ी उपलब्धि: बनी सुपर बैटरी, तीन गुना ज्यादा स्टोरेज क्षमता ⚡🔋
📍 वाराणसी।
आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के वैज्ञानिकों ने ऊर्जा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी खोज की है। संस्थान के सिरामिक इंजीनियरिंग विभाग ने ऐसी सुपर बैटरी का प्रोटोटाइप तैयार किया है जो न केवल मौजूदा बैटरियों से तीन गुना ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकती है, बल्कि इसका आकार भी बाजार में उपलब्ध घरेलू इनवर्टर बैटरियों से तीन गुना छोटा होगा।
देश में पहली बार बना डबल आयन बैटरी का प्रोटोटाइप
👉 यह देश का पहला पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड डबल आयन बैटरी प्रोटोटाइप है।
👉 बैटरी की तकनीक को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ पॉवर सोर्सेज में प्रकाशित किया गया है और इसका पेटेंट भी फाइल किया जा चुका है।
👉 वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे सोलर और विंड एनर्जी के भंडारण की क्षमता कई गुना बढ़ेगी और ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार की समस्या दूर हो सकेगी।
2030 तक 61,000 मेगावाट स्टोरेज की जरूरत 🔑
रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि भारत को वर्ष 2030 तक 61,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज की जरूरत होगी। फिलहाल यह क्षमता केवल 442 मेगावाट है।
👉 नई बैटरी तकनीक इस अंतर को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
👉 इन्हें ग्रिड के पास ही इंस्टॉल किया जा सकता है, जिससे बिजली की घरेलू समस्याएं भी कम होंगी।
मोबाइल से लेकर राष्ट्रीय ग्रिड तक इस्तेमाल
डॉ. सिंह ने बताया कि देश में पोटेशियम आयन बैटरी पहले भी विकसित हो रही हैं, लेकिन वे सिर्फ लिथियम आयन बैटरी का विकल्प बन रही थीं, जिनका उपयोग मोबाइल और छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तक सीमित है।
👉 जबकि बीएचयू की यह डबल आयन बैटरी खासतौर पर देश की ऊर्जा जरूरत और बड़े स्तर के स्टोरेज के लिए डिजाइन की गई है।
रिसर्च टीम
इस उपलब्धि में डॉ. प्रीतम सिंह के साथ अंकित राज, नीरज कुमार मिश्रा, कृष्ण गोपाल निगम, अभिजीत सिंह, सोहम मुखर्जी, आशा गुप्ता और अखिलेश सिंह शामिल रहे।
✅ संक्षेप में:
- IIT-BHU ने बनाई सुपर बैटरी – तीन गुना ज्यादा स्टोरेज, तीन गुना छोटा आकार।
- पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड डबल आयन बैटरी का देश में पहला प्रोटोटाइप।
- 2030 तक भारत को 61,000 मेगावाट स्टोरेज की जरूरत, अभी सिर्फ 442 मेगावाट।
- पेटेंट फाइल, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित।
- सौर और पवन ऊर्जा के भंडारण की समस्या का समाधान।
यह खोज भारत को स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में नई ऊंचाई दे सकती है और आने वाले समय में घर-घर तक सस्ती और भरोसेमंद बिजली पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। 🌍⚡
