हाईकोर्ट सख्त: मुकदमों की फाइलों में लाल थूक वाले पन्ने बैन, रजिस्ट्री व अधिवक्ताओं को निर्देश 🚫📑
📍 लखनऊ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मुकदमों की फाइलों में लाल थूक (पान-गुटखा) लगे पन्नों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यह न केवल घृणास्पद और निंदनीय चलन है, बल्कि इससे संपर्क में आने वाले लोगों के संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ता है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कहा कि—
👉 मुकदमों की फाइलों में ऐसे गंदे पन्नों को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
👉 सुबह से 10 से ज्यादा फाइलों में थूक लगे पन्ने पाए गए, जो बेहद आपत्तिजनक है।
👉 यह चलन अगर नहीं रोका गया तो न्यायिक प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा।
जिम्मेदारियों को लेकर आदेश
- सीनियर रजिस्ट्रार और रजिस्ट्री अनुभाग प्रभारी को निर्देश दिए गए कि दाखिला लेते समय फाइलों को ध्यान से जांचें।
- शासकीय अधिवक्ता (GA) और मुख्य स्थायी अधिवक्ता (CSC) को आदेश दिया गया कि वे अपने दफ्तरों में इस गंदे चलन को रोकने के लिए लिखित आदेश जारी करें।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि अब ऐसी पत्रावलियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
थूक की वजह क्या? 🤢
कोर्ट की टिप्पणी में कहा गया कि संभवतः यह लाल थूक मुंशियों, ओथ कमिश्नरों, रजिस्ट्री स्टाफ या अधिवक्ताओं के दफ्तरों से आ रहा है। माना जा रहा है कि पान-गुटखा खाकर फाइलें पलटने से यह समस्या हो रही है।
मामला किससे जुड़ा था?
यह आदेश बहराइच की कृष्णावती की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में संपत्ति अटैच करने के मामले में महसी तहसील के एसडीएम और निगरानी अदालत के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
👉 कोर्ट ने फिलहाल इन आदेशों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
👉 अगली सुनवाई 27 अक्तूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
✅ संक्षेप में:
- हाईकोर्ट ने लाल थूक लगे पन्नों पर कड़ा रुख अपनाया।
- सीनियर रजिस्ट्रार और अधिवक्ताओं को ऐसी फाइलें न स्वीकारने का निर्देश।
- पान-गुटखा खाकर पन्ने पलटने की गंदी आदत पर रोक।
- कोर्ट ने कहा यह निंदनीय, घृणास्पद और संक्रमण का कारण।
