✍️ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिक्षकों का विरोध – टीईटी अनिवार्यता से छूट की मांग तेज
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्य किए जाने के फैसले ने शिक्षकों में गहरी असंतोष की लहर पैदा कर दी है।
👉 शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय न केवल उनके अधिकारों के खिलाफ है, बल्कि पहले से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और सेवाओं की अनदेखी भी करता है।
⚫ काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
- सोमवार से प्रदेश के कई जिलों — लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, अयोध्या, गोंडा आदि — में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया।
- यह विरोध 15 अक्तूबर तक जारी रहेगा।
- शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने पहल नहीं की तो आंदोलन और तेज़ होगा।
📌 संगठनों की मांगें
- केंद्र सरकार 2017 में किए गए संशोधन को निरस्त करे।
- टीईटी की अनिवार्यता से कार्यरत शिक्षकों को छूट दी जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल की जाए।
🎤 शिक्षकों की आवाज़
- सुशील कुमार पांडेय (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ):
“केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल पहल करनी चाहिए। शिक्षकों का संघर्ष कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी जारी रहेगा।” - विनय कुमार सिंह (प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन):
“हम जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो दिल्ली में धरना देने को मजबूर होंगे।” - संतोष तिवारी (प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन):
“राज्य सरकार ने रिव्यू में जाने का निर्णय लिया है, लेकिन यह राष्ट्रीय मुद्दा है। केंद्र सरकार को तुरंत पहल करनी होगी।”
✍️ सरकारी कलम की राय
शिक्षक देश की नींव हैं। जो लोग वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा को नज़रअंदाज़ करना संवेदनहीनता है।
👉 केंद्र सरकार को चाहिए कि:
- इस मामले में संवेदनशीलता दिखाए,
- कार्यरत शिक्षकों को छूट प्रदान करे,
- और उनकी नौकरी व भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
सरकारी कलम शिक्षकों की इस न्यायसंगत मांग के साथ खड़ा है।
