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अनुसूचित जाति/जनजाति पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक शिक्षक महासभा का हल्ला बोल
शिक्षा निदेशालय पर प्रदर्शन, 23 सूत्रीय मांग पत्र राज्यपाल व मुख्यमंत्री को प्रेषित
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग 2023 में संशोधन, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण और अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त अध्यापकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली (OPS) लागू करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर अनुसूचित जाति/जनजाति पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक शिक्षक महासभा ने मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने अपना 23 सूत्रीय मांग पत्र शिक्षा निदेशक के माध्यम से राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भेजा।
मुख्य मांगें 📌
- शिक्षा सेवा चयन आयोग 2023 में संशोधन कर 1982 के माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 12, 18 और 21 को शामिल किया जाए।
- सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए।
- अप्रैल 2005 से नियुक्त अध्यापकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली (OPS) लागू की जाए।
- वरिष्ठ अनुसूचित जाति के अध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाए जाने में हो रही अनियमितताओं और भेदभाव पर रोक लगे।
- अध्यापकों को पदोन्नति, वार्षिक वेतन वृद्धि, चयन व पदोन्नति वेतनमान के अधिकार दिए जाएं।
उत्पीड़न का आरोप ⚖️
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुंदर दास शास्त्री ने कहा कि प्रबंधतंत्र की ओर से वरिष्ठ एससी अध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाचार्य पद से वंचित करने के लिए झूठे आरोप लगाकर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे प्रबंधतंत्र के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो।
महासभा के नेता रहे मौजूद 👥
इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. छोटेलाल, उपाध्यक्ष डॉ. राम अवतार, उपाध्यक्ष राजवीर, प्रदेश कोषाध्यक्ष जयपाल शास्त्री और प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश कुमार गौतम समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और सरकार को चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
👉 यह खबर शिक्षकों की आवाज़ को मजबूत करती है और सरकार के समक्ष पेंशन, पदोन्नति व समान अवसर की लड़ाई को सामने लाती है।
