✊ शिक्षक महासभा का प्रदर्शन: 23 सूत्रीय मांग पत्र राज्यपाल व मुख्यमंत्री को प्रेषित
लखनऊ।
अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक शिक्षक महासभा ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षा निदेशक के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
📌 मुख्य मांगें
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुंदर दास शास्त्री ने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगें हैं –
- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग 2023 में संशोधन।
- सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण।
- अप्रैल 2005 से नियुक्त अध्यापकों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ।
- माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड 1982 की धारा 12, 18 एवं 21 के प्रावधानों को नए आयोग में शामिल करना।
⚖️ शिक्षकों पर हो रहा अन्याय
डॉ. शास्त्री ने आरोप लगाया कि प्रबंधतंत्र की ओर से वरिष्ठ अनुसूचित जाति अध्यापकों को कार्यवाहक प्रधानाचार्य पद से वंचित किया जा रहा है।
- आरोप लगाकर निलंबन व सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जा रही है।
- पदोन्नति, वार्षिक वेतन वृद्धि, चयन वेतनमान और पदोन्नति वेतनमान जैसे लाभों से भी वंचित किया जा रहा है।
महासभा ने मांग की कि ऐसे उत्पीड़नकारी प्रबंधतंत्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
👥 महासभा की टीम
प्रदर्शन के दौरान कई पदाधिकारी मौजूद रहे –
- वरिष्ठ उपाध्यक्ष – डॉ. छोटेलाल
- उपाध्यक्ष – डॉ. राम अवतार, राजवीर
- प्रदेश कोषाध्यक्ष – जयपाल शास्त्री
- प्रदेश संगठन मंत्री – बृजेश कुमार गौतम
इन सभी ने अपने विचार रखते हुए शिक्षकों के हक़ की लड़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया।
✨ निष्कर्ष
शिक्षक महासभा का यह आंदोलन सिर्फ अधिकारों की मांग नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता स्थापित करने की पुकार है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी 23 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
शिक्षक समाज की रीढ़ हैं – और रीढ़ को मज़बूत किए बिना मज़बूत भारत की कल्पना अधूरी है। 📚✊
