इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को मिलेगा प्रधानाध्यापक पद का वेतनमान ✍️
📍 पीलीभीत :- इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश,
बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत उन सहायक अध्यापकों के लिए खुशखबरी है, जो लंबे समय से इंचार्ज प्रधानाध्यापक के रूप में स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योग्य शिक्षकों को प्रधानाध्यापक पद का वेतनमान दिया जाए।
मामला क्या है? 📝
सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिकाएँ एवं स्पेशल अपील दाखिल की थीं। इनमें प्रमुख मामले रहे –
- याचिका संख्या 15225/2024 (मयंक जायसवाल व अन्य 58)
- याचिका संख्या 13563/2024 (वसीम राशिद व अन्य 11)
- स्पेशल अपील संख्या 835/2024 (विजय कुमार शर्मा व अन्य 57)
- स्पेशल अपील संख्या 1104/2024 (प्रदीप कुमार व अन्य 126)
- स्पेशल अपील संख्या 139/2025 (चन्द्रशेखर गंगवार व अन्य 93)
इन सभी अपीलों का संबंध एक ही मुद्दे से था —
👉 क्या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक का वेतनमान दिया जाए?
हाईकोर्ट का आदेश (30 अप्रैल 2025) ⚖️
माननीय हाईकोर्ट, इलाहाबाद ने स्पेशल अपील संख्या 652/2024 (सेक्रेट्री यूपी बेसिक एजुकेशन बोर्ड बनाम त्रिपुरारी दुबे) में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा –
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) यह जांच करेंगे कि शिक्षक के पास कम से कम पाँच वर्ष का अनुभव है और वह लगातार इंचार्ज प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत रहा है या नहीं।
- यदि शिक्षक लंबे समय से प्रधानाध्यापक का कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें वेतन का भुगतान किया जाएगा। हालांकि, बकाया भुगतान केवल तीन वर्ष पूर्व तक ही दिया जाएगा, याचिका दाखिल करने की तिथि से।
- BSA को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि केवल वरिष्ठ सहायक शिक्षक ही इंचार्ज प्रधानाध्यापक बनें, ताकि कनिष्ठ शिक्षक को यह जिम्मेदारी न मिले और विवाद की स्थिति न बने।
- पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी की जाए और पात्र शिक्षकों को भुगतान में देरी न हो।
इसका असर शिक्षकों पर 👩🏫👨🏫
- अब हजारों इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को न्याय मिलेगा।
- लंबे समय से सिर्फ जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों को अब वेतनमान का हक भी मिलेगा।
- यह फैसला उन शिक्षकों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो भविष्य में इंचार्ज प्रधानाध्यापक की भूमिका निभाएँगे।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया ✨
👉 शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला उनके संघर्षों की जीत है।
👉 अब तक वे प्रधानाध्यापक का कार्य तो कर रहे थे लेकिन आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था।
👉 कोर्ट के आदेश के बाद सरकार पर अब इस दिशा में त्वरित कार्यवाही करने की जिम्मेदारी आ गई है।
निष्कर्ष 🏫
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला बेसिक शिक्षा परिषद के लिए ऐतिहासिक है।
✅इसे पीलीभीत से शुरू होकर हर जिले तक अतिशीघ्र पहुंचना अतिआवश्यक है ।।🚨
👉 यह न सिर्फ इंचार्ज प्रधानाध्यापकों का सम्मान बढ़ाता है बल्कि उनके आर्थिक अधिकारों की भी रक्षा करता है।
👉 अब ज़रूरी है कि शासन-प्रशासन निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन करे, ताकि न्याय की प्रक्रिया में और देरी न हो।
✍️ लेखक – सरकारी कलम टीम
📅 दिनांक : 16 सितम्बर 2025

