परंपरागत पाठ्यक्रमों BA. Bsc की फीस पर अब लगाम

✍️ परंपरागत पाठ्यक्रमों की फीस पर अब लगाम

अब तक मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्सों के लिए मानक शुल्क (Standard Fee) तय होता रहा है, लेकिन बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे परंपरागत पाठ्यक्रमों में कोई एकसमान शुल्क व्यवस्था नहीं थी। इसी वजह से खासकर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में मनमाने तरीके से फीस वसूली की शिकायतें आती रही हैं।

👉 क्या बदलेगा?

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  • उच्च शिक्षा विभाग अब परंपरागत पाठ्यक्रमों की भी मानक फीस तय करेगा।
  • कॉलेज अपनी सुविधाओं और संसाधनों के आधार पर तय सीमा से अधिक शुल्क नहीं ले सकेंगे।
  • यानी छात्र-छात्राओं के लिए अब फीस में असमानता और मनमानी वसूली पर रोक लगेगी।

👉 वर्तमान स्थिति

  • उत्तर प्रदेश के 7925 डिग्री कॉलेजों में 54.76 लाख छात्र पढ़ते हैं।
  • कहीं बीए/बीएससी की फीस 3000-8000 रुपये तक है, तो कहीं वही कोर्स 15-20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर तक पहुंच जाता है।
  • एडेड और राजकीय कॉलेजों की फीस अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन प्राइवेट सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में यह बेहद अधिक है।

👉 इस कदम का असर

  • छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा
  • कॉलेजों के बीच फीस स्ट्रक्चर में पारदर्शिता आएगी।
  • परंपरागत शिक्षा को लेकर अत्यधिक खर्च का डर कम होगा, जिससे ज्यादा बच्चे उच्च शिक्षा की ओर आकर्षित होंगे।

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