✍️ टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग पर शिक्षकों का आंदोलन तेज, 16 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए सेवा जारी रखने और पदोन्नति में टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज कर दी है। संघ का कहना है कि इन शिक्षकों ने पहले ही निर्धारित नियमों के अनुसार नियुक्ति पाई थी, ऐसे में उनके लिए नई शर्तें थोपना अन्याय है।
📢 16 सितंबर को प्रदेशव्यापी ज्ञापन
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने घोषणा की है कि इस मांग को लेकर 16 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर शिक्षक एकत्र होंगे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।
उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों और शिक्षकों से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर एकजुटता की ताकत दिखाएं।
📌 शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बनाए रखा जाए।
- पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
- पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
🧑🏫 संघ का तर्क
- इन शिक्षकों ने उस समय की शैक्षिक व विधिक योग्यताओं के आधार पर नौकरी पाई थी।
- बाद में लागू हुए नए नियमों को पहले से कार्यरत शिक्षकों पर थोपना संवैधानिक और नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है।
- अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
⚖️ बड़ा सवाल
यह मुद्दा न केवल शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा से जुड़ा है बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य की नीतियों पर भी सीधा असर डालता है।
👉 यदि सरकार उनकी मांगों को मान लेती है तो हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी।
👉 वहीं अगर अनदेखी हुई तो आने वाले समय में आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
📝 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का यह आंदोलन राज्य की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की असुरक्षा और नीति के टकराव को सामने लाता है।
अब सबकी निगाहें 16 सितंबर को होने वाले प्रदर्शनों और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
