टीईटी की अनिवार्यता से शिक्षक ने की आत्महत्या, शिक्षा जगत में रोष! 😔📢
स्थान: कबरई ब्लॉक, महोबा (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा विभाग की नीतियों और टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता ने एक और शिक्षक की जिंदगी ले ली। उच्च प्राथमिक विद्यालय प्रेमनगर के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार साहू (49) ने सोमवार सुबह करीब 7 बजे अपने ही घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना कैसे हुई?
मनोज कुमार साहू, जो बीटीसी और इंटर पास थे, ने पिता के निधन के बाद 1992-93 में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाई थी।
सोमवार सुबह उन्होंने पत्नी से कहा कि वह टहलने जा रहे हैं और घर की दूसरी मंजिल पर चले गए।
काफी देर तक वापस न आने पर परिजन ऊपर गए तो देखा कि वह फंदे से लटक रहे थे।
तुरंत उन्हें नीचे उतारकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
टीईटी की अनिवार्यता: क्या यही बना कारण?
मनोज के चचेरे भाई नरेंद्र कुमार के अनुसार, मनोज लंबे समय से टीईटी की अनिवार्यता को लेकर परेशान थे।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार की कठोर नीतियां और बार-बार बदलते नियम कई अनुभवी शिक्षकों के लिए असुरक्षा का कारण बन गए हैं।
शिक्षक संगठनों का आक्रोश 😡
महोबा में इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों में गहरा रोष है।
वे मांग कर रहे हैं कि:
- मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी में राहत दी जाए।
- टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार हो।
- ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
क्यों बार-बार शिक्षक हो रहे हैं शिकार?
शिक्षा विभाग में बदलती नीतियां, अस्थिरता और अनुभवी शिक्षकों को बार-बार नई परीक्षाओं में झोंकना, उनके आत्मसम्मान पर चोट कर रहा है।
यह घटना एक नीतिगत असंवेदनशीलता का परिणाम लगती है।
क्या होगा आगे?
सरकार और विभाग के सामने अब बड़ा सवाल है –
क्या टीईटी की अनिवार्यता को लेकर राहत दी जाएगी?
या फिर ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी?
