कम नामांकन वाले स्कूलों का विलय: बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए नए निर्देश 🏫
प्रदेश के कम नामांकन वाले विद्यालयों के विलय (पेयरिंग) को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बार फिर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग हो सके।
क्या है नया आदेश?
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी बीएसए (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग एक किलोमीटर से अधिक दूर न हो।
- उच्च प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग तीन किलोमीटर से अधिक दूर न हो।
- 50 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों की पेयरिंग को निरस्त करने के पूर्व आदेश का सख्ती से पालन किया जाए।
पृष्ठभूमि क्या है?
यह आदेश हाईकोर्ट में सीतापुर जिले के स्कूलों से संबंधित मामले में चल रही सुनवाई के अनुपालन में जारी किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और उनके लिए उपलब्ध संसाधनों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
पेयरिंग से क्या होगा फायदा?
- संसाधनों का सही उपयोग होगा।
- शिक्षकों की उपलब्धता और तैनाती बेहतर होगी।
- विद्यार्थियों को सुविधाजनक दूरी पर शिक्षा उपलब्ध होगी।
सरकारी कलम की राय
पेयरिंग नीति का सही क्रियान्वयन तभी संभव होगा जब इसे बिना छात्रों की पढ़ाई प्रभावित किए लागू किया जाए। साथ ही, 50 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों को पेयरिंग से बाहर रखने का कदम सराहनीय है।
