टड़ियावां: मिड-डे मील में गड़बड़ी पर अभिभावकों का हंगामा, जांच में उठे सवाल 🥛🍚
हरदोई जनपद के टड़ियावां विकास खंड के देबिया फत्तेपुर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) वितरण को लेकर बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। अभिभावकों का आरोप है कि बुधवार को बच्चों को तहरी की जगह मात्र पीले चावल परोसे गए और न तो सोयाबीन डाला गया, न ही आलू की सब्ज़ी, जबकि निर्धारित मेन्यू के अनुसार पोषक तहरी दी जानी चाहिए थी। इतना ही नहीं, बुधवार को दूध वितरण भी नहीं हुआ, जिससे बच्चों के पौष्टिक आहार पर प्रश्नचिन्ह लग गया।
क्या है पूरा मामला?
- विद्यालय में कुल 187 बच्चे पढ़ते हैं।
- बुधवार को निर्धारित मेन्यू में सोयाबीन व सब्जियों वाली तहरी और दूध वितरित होना चाहिए था।
- अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों को केवल पीले चावल परोसे गए।
- दूध वितरण को लेकर भी शिकायत सामने आई।
गांव के अभिभावक संदीप सिंह, संतू और शुभम ने खुलकर कहा कि यह बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
जिम्मेदारों का क्या कहना है?
प्रधानाध्यापक राकेश मिश्रा ने आरोपों को ग्राम पंचायत की राजनीति से जोड़ते हुए कहा,
“गांव की राजनीति के चलते यह मुद्दा तूल दिया जा रहा है।”
वहीं खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार झा मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। उनका बयान और भी चौंकाने वाला था—
“अगर बुधवार को दूध नहीं बंट पाया तो गुरुवार को बांट देंगे। फोटो खींचकर भेजें और 15 दिन बाद फिर निरीक्षण करेंगे।”
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने कहा,
“शिकायत मिली है, जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।”
बड़ा सवाल: बच्चों के हक का पोषण कब तक खिलवाड़ बनेगा? 🤔
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक आहार मिले ताकि उनकी सेहत और पढ़ाई पर सकारात्मक असर हो। लेकिन, ऐसी लापरवाहियां बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही हैं।
- अगर बुधवार को दूध नहीं बंटा तो क्या गुरुवार को बांटने से पोषण पूरा होगा?
- हर सप्ताह मेन्यू बदलने के बावजूद क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित हैं?
- क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
सरकारी कलम की राय ✍️
सरकारी योजनाएं तभी सफल होंगी जब जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही होगी। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और प्रधानाध्यापक दोनों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, साथ ही हर सप्ताह की मिड-डे मील रिपोर्ट को सार्वजनिक करना अनिवार्य होना चाहिए।
बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
