🏫 अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के फर्जी अभिलेखों की जांच शुरू
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 49 के तहत चयनित प्राचार्यों के अभिलेखों की जांच अब तेज हो गई है। चयनित प्राचार्यों की नियुक्ति के चार साल बाद भी कई प्राचार्यों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं हुआ था, जिस पर गंभीर सवाल उठे हैं।
📜 मामला क्या है?
- इस भर्ती में 290 प्राचार्य पदों पर चयन हुआ था।
- पांच अक्टूबर 2021 को चयनित प्राचार्यों को कार्यभार ग्रहण कराया गया था।
- आरोप है कि करीब 70% अभ्यर्थियों ने फर्जी अभिलेख और शोध अनुभव प्रस्तुत करके चयन प्राप्त किया।
- इन्हीं कारणों से उनकी शैक्षणिक सूचनाएं मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं की गईं।
🕵️♂️ जांच की वर्तमान स्थिति
- उरई निवासी सलिल कुमार तिवारी की शिकायत पर उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज ने 31 मार्च 2025 को जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- अब 14 अगस्त 2025 को संयुक्त निदेशक डॉ. शशि कपूर ने सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
📊 भर्ती प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
- 20 मार्च से 12 अगस्त 2021 तक साक्षात्कार आयोजित हुए।
- 630 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए सफल हुए, जिनमें से 526 ने प्रतिभाग किया।
- नियुक्त प्राचार्यों में से 100 से अधिक अपने मूल महाविद्यालयों में लौट गए, और उनकी जगह कार्यवाहक प्राचार्य कार्यरत हैं।
⚠️ सवालों के घेरे में पारदर्शिता
यह पूरा मामला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
- प्रमाणपत्रों का सत्यापन समय पर क्यों नहीं हुआ?
- फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर नियुक्तियां कैसे हो गईं?
- चार साल तक विभाग ने कार्रवाई क्यों टाली?
अब देखना होगा कि यह जांच कितनी गहराई तक जाती है और फर्जी अभिलेख वाले प्राचार्यों पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है।
