सरकारी स्कूलों के शिक्षक बदल रहे हैं शिक्षा व्यवस्था का चेहरा ✨
सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले कई शिक्षक अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर शिक्षा की नई दिशा तय कर रहे हैं। ये शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की राह दिखा रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी — निःशुल्क और परिणामदायक
- शिक्षक स्वयंसेवी रूप से अतिरिक्त कक्षाएं चला रहे हैं।
- माडल पेपर तैयार करवा रहे हैं।
- व्हाट्सएप क्विज, ऑनलाइन टेस्ट और सर्वे हर्ट एप जैसे डिजिटल साधनों का उपयोग कर रहे हैं।
पिछले सत्र में इनके प्रयासों से 495 विद्यार्थी राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफल हुए।
डिजिटल नवाचार ने बढ़ाई पढ़ाई की गुणवत्ता 📲
कंपोजिट स्कूल मसिका के शिक्षक अंतरिक्ष शुक्ल ने आधुनिक तरीकों से पढ़ाई को रोचक बनाया।
- अवकाश के दिनों में भी कक्षाएं
- साप्ताहिक माडल पेपर
- मिशन शिक्षण संवाद की ऑनलाइन क्लासेस
- दैनिक क्विज द्वारा विषयगत कमियों का समाधान
विद्यार्थियों की बड़ी उपलब्धियां 🌟
- नवोदय प्रवेश परीक्षा
- इंस्पायर अवार्ड
- संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता
- नीट और जेईई जैसी कठिन परीक्षाओं में भी सरकारी स्कूलों के बच्चों ने झंडा गाड़ा।
प्रेरक शिक्षक समूह
इन प्रयासों के पीछे कई शिक्षकों की सामूहिक पहल है, जैसे:
- सुनील कुमार सरोज (कंपोजिट विद्यालय रामपुर देवली)
- रामलखन मौर्य (उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसा)
- डॉ. रीना मिश्रा (संविलयन विद्यालय चक सिकंदर)
- शत्रुंजय शर्मा (असरावे खुर्द)
- जय सिंह (उच्च प्राथमिक विद्यालय हथिगहां)
- प्रभाशंकर शर्मा (कंपोजिट स्कूल घाटमपुर)
- सुनील शुक्ल (सुजौना)
इन शिक्षकों ने मिशन शिक्षण संवाद, नया सवेरा, और मिशन आइडियल स्कूल जैसे समूह बनाकर सरकारी शिक्षा को एक नई पहचान दी है।
