कस्तूरबा विद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों का बड़ा खुलासा: बीएसए समेत 8 पर मुकदमा दर्ज 🚨
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कोर्ट के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने रविवार शाम बीएसए अतुल कुमार तिवारी, वित्त एवं लेखाधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित (वर्तमान में रायबरेली में तैनात) सहित सात नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कूटरचना व फ्रॉड के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम अनामिका शुक्ला का सामने आया है। वही अनामिका, जिनके नाम पर पूर्व में भी कस्तूरबा विद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों का भंडाफोड़ हुआ था।
क्या है पूरा मामला? 🧐
गोंडा निवासी प्रदीप कुमार पांडेय ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि विभाग में युवाओं का डाटा लीक कर उनके नाम से फर्जी नियुक्तियां की जा रही थीं। इस घोटाले में कई बड़े अधिकारी और कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोपियों में शामिल हैं:
- बीएसए अतुल कुमार तिवारी
- वित्त एवं लेखाधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित
- पटल लिपिक सुधीर सिंह
- अनुपम पांडेय (वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लिपिक)
- दिग्विजय नाथ पांडेय (भैया चंद्र भान दत्त पांडेय लघु माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक)
- प्रधानाचार्य, भुलईडीह
- अनामिका शुक्ला
- एक अज्ञात व्यक्ति
अनामिका शुक्ला का विवाद फिर गरमाया 🔥
2017 में अनामिका शुक्ला ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के पद के लिए आवेदन किया था। बाद में उनके नाम से कई फर्जी नियुक्तियां की गईं। असली अनामिका शुक्ला ने खुद को बेरोजगार बताते हुए बीएसए ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
लेकिन अब जांच में बड़ा मोड़ आया है—जिन अनामिका को पीड़िता बताया गया था, वही सरकारी अध्यापिका के पद पर 2017 से कार्यरत थीं और वेतन भी ले रही थीं।
जांच के बाद ही होगी आगे की कार्रवाई 🕵️♂️
एसपी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जांच के बाद मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्यों है यह मामला महत्वपूर्ण?
- शिक्षा विभाग में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल ❓
- युवाओं के डेटा लीक कर धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप
- पहले पीड़ित बताई गई व्यक्ति ही अब आरोपी के तौर पर सामने
सरकारी कलम की राय ✍️
शिक्षा व्यवस्था में इस तरह के फर्जीवाड़े न केवल योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य छीनते हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी जनता का भरोसा डगमगा देते हैं। जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
