सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी से वसूली नहीं की जा सकती 👩‍⚖️👨‍⚖️

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी से वसूली नहीं की जा सकती 👩‍⚖️👨‍⚖️

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद दी गई ग्रेच्युटी की राशि से कोई भी वसूली नहीं की जा सकती, खासकर तब जब उस वसूली से संबंधित मुकदमा पहले ही अदालत से खारिज हो चुका हो।


मामला क्या था? ⚖️

  • अपीलकर्ता कमलेश टुटेजा, प्रबंधक पद से 30 अप्रैल 2010 को पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम लिमिटेड से सेवानिवृत्त हुए।
  • उन्हें 6.50 लाख रुपये की ग्रेच्युटी मिली, लेकिन इसमें से 75,720 रुपये की कटौती कर ली गई।
  • शेष राशि (₹5,74,280 ब्याज सहित) की वसूली के लिए राज्य प्राधिकारियों ने 2015 में सिविल कोर्ट में वाद दायर किया, लेकिन वह खारिज हो गया।
  • इसके बाद राज्य ने पहली और दूसरी अपील भी की, मगर दोनों खारिज हो गईं।

फिर भी राज्य ने कर्मचारी से वसूली की कार्यवाही जारी रखी।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 🏛️

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा :

  • हाईकोर्ट द्वारा याचिका को “देरी और लापरवाही” बताकर खारिज करना गलत था।
  • जब एक बार सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों वसूली के खिलाफ फैसला दे चुके हैं, तो कर्मचारी से कोई वसूली नहीं की जा सकती
  • राज्य प्राधिकारियों की कार्रवाई पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य थी।

इसका असर 👩‍🏫👨‍💼

यह फैसला उन लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जिन्हें अक्सर विभाग सेवानिवृत्ति लाभ (ग्रेच्युटी, पेंशन, एरियर आदि) से वसूली करके परेशान करता है।
अब यह स्पष्ट है कि :

  • एक बार भुगतान हो चुकी ग्रेच्युटी से वसूली नहीं होगी
  • विभाग अगर वसूली का दावा करता है और वह अदालत से खारिज हो चुका है, तो उसे दोबारा उठाया नहीं जा सकता।

सरकारी कलम की राय 🖋️

सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी पूरी सेवा सरकार को समर्पित करते हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद उनकी ग्रेच्युटी और पेंशन ही जीवनयापन का सहारा होती है। इन पैसों से वसूली करना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक पीड़ा को बढ़ाता है।

👉 सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के पक्ष में ऐतिहासिक है और इससे भविष्य में विभागीय मनमानी पर रोक लगेगी।


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