सीतापुर में शिक्षामित्र के नियम विरुद्ध अटैचमेंट का मामला – BEO को नोटिस, तीन दिन में जवाब तलब
सीतापुर, 11 अगस्त 2025 —
विकासखण्ड बेहटा के प्रा.वि. ऊँचगाँव और प्रा.वि. बेहटा 2 से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें शिक्षामित्र को वर्षों तक बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) पर नियम विरुद्ध अटैच रखने, लंबी अनुपस्थिति, और उपस्थिति पंजिका में हेरफेर के आरोपों की पुष्टि हुई है।
📌 जांच में क्या मिला?
- श्री राजेश द्विवेदी, शिक्षामित्र, प्रा.वि. बेहटा 2
- अप्रैल 2022 – अक्टूबर 2022: उपस्थिति पंजिका पर कोई हस्ताक्षर नहीं, प्रभारी प्रधानाध्यापक ने नाम तक अंकित नहीं किया।
- 20 जनवरी 2025 – मई 2025: भंडारण सहायक के रूप में बीआरसी पर कार्यरत, विद्यालय में अनुपस्थित।
- 16 जून 2025 – 29 जुलाई 2025: बीआरसी पर बिना आदेश उपस्थित।
- अप्रैल 2024 – अक्टूबर 2024: बीआरसी पर बिना आदेश दर्ज।
- नवम्बर 2024 एवं दिसम्बर 2024: पहले CL (अवकाश) अंकित, बाद में सफेदा लगाकर हस्ताक्षर कराए गए।
- प्रभारी प्रधानाध्यापक
- 2021 से पूर्व के उपस्थिति अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए, जिससे संलिप्तता की आशंका।
📜 नोटिस और अगला कदम
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अखिलेश प्रताप सिंह ने इस मामले में खण्ड शिक्षा अधिकारी, श्रीमती विभा सचान को नोटिस जारी कर 3 दिन में स्पष्टीकरण मय साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
⚖️ बड़ा सवाल
- क्या यह मामला सिर्फ़ एक व्यक्ति का है या बीआरसी स्तर पर व्यापक पैमाने पर नियम विरुद्ध अटैचमेंट की परंपरा चल रही है?
- इतने लंबे समय तक बिना आदेश बीआरसी पर कार्यरत रहने की अनुमति किन स्तरों से मिली?
- उपस्थिति पंजिका में सफेदा लगाकर हस्ताक्षर बदलना क्या एक आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं आता?
🖋 “सरकारी कलम” की टिप्पणी
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में जमी ढीली मॉनिटरिंग और मनमानी कार्यप्रणाली का आइना है।
जब बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और शिक्षक/शिक्षामित्र विद्यालय में न जाकर बीआरसी पर बैठे हैं, तो इसका सीधा नुकसान छात्रों को हो रहा है।
अब ज़रूरत है कि
- जांच को सिर्फ कागज तक सीमित न रखा जाए
- दोषियों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हो
- और पूरे जनपद में ऐसे मामलों का ऑडिट कराया जाए।
