🏫 शिक्षा का मंदिर या निजी बंगला?
✍️ सरकारी कलम | विशेष रिपोर्ट | हाथरस
जहां एक ओर सरकार बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो विद्यालय को अपने घर का आंगन समझ बैठे हैं। मामला है प्राथमिक विद्यालय हवीपुर, सिकंदराराऊ, हाथरस का, जहां एक सहायक अध्यापिका ने सारी सीमाएं पार करते हुए शिक्षा को शर्मसार कर दिया।
👩🏫 क्या किया शिक्षिका ने?
विद्यालय की सहायक अध्यापिका फरहीन रईस पर आरोप है कि उन्होंने बिना प्रधानाध्यापक या प्रबंध समिति की अनुमति के 11 छात्रों के नाम प्रेरणा पोर्टल से हटा दिए, वो भी बिना टीसी दिए। इससे विद्यालय का नामांकन 32 से घटकर 21 रह गया — और ये उस समय हुआ जब पूरे प्रदेश में “स्कूल चलो अभियान” जोरों पर है!
लेकिन यही नहीं, मामला यहीं खत्म नहीं होता।
🍽️ बच्चों से बर्तन धुलवाना, अपना बच्चा खिलवाना!
शिकायतों के अनुसार, शिक्षिका ने न केवल छात्रों के नाम जबरन हटाए, बल्कि अपने निजी कार्य भी बच्चों से करवाए — बर्तन धुलवाना, अपने बच्चे को खिलवाना, और रविवार को अवकाश में रैली कराना जैसी गतिविधियाँ सामने आईं।
📉 शैक्षिक वातावरण पर कालिख
बीएसए स्वाति भारती की ओर से की गई जांच में शिक्षिका का व्यवहार न केवल शिक्षा के प्रति उदासीन पाया गया, बल्कि बच्चों और अभिभावकों से भी दुर्यव्यवहार की पुष्टि हुई।
शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेना, विद्यालय का माहौल खराब करना, और विभाग की छवि धूमिल करना — इन आरोपों के चलते शिक्षिका को निलंबित कर नगर क्षेत्र हाथरस में अटैच किया गया है।
📜 बहानेबाज़ी का जवाब – फर्जी बच्चे?
शिक्षिका ने जवाब में कहा कि “बच्चों के नाम फर्जी चल रहे थे”, इसलिए उन्होंने हटाए। लेकिन जांच में पाया गया कि सभी छात्र पंजिका में मौजूद थे और कुछ बच्चे अनियमित रूप से आ रहे थे, जो किसी भी हालत में नाम काटने का आधार नहीं बनता।
🤔 हमारा सवाल: क्या ऐसे शिक्षकों से होगा “नए भारत का निर्माण”?
सरकार टैबलेट, स्मार्ट क्लास, ICT लैब देने में लगी है — लेकिन अगर शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगें तो इन संसाधनों का क्या लाभ?
क्या ऐसे शिक्षक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं?
“शिक्षक का धर्म शिक्षा है, सत्ता नहीं” — इस मूल मंत्र की जरूरत फिर से है।
🟡 आपकी क्या राय है? क्या ऐसे शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए? कमेंट में बताएं।
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