⚖️ “निजी अस्पताल मरीजों के लिए बने ATM!” – इलाहाबाद हाईकोर्ट का तीखा प्रहार
📍 प्रयागराज | 26 जुलाई 2025
रिपोर्ट: सरकारी कलम संवाददाता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ये संस्थान मरीजों को “पैसे निकालने वाले एटीएम” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी देवरिया के एक चिकित्सा लापरवाही मामले में आरोपी डॉक्टर को राहत देने से इनकार करते हुए की।
👩⚕️ भ्रूण की मौत, डॉक्टर को राहत नहीं
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने आरोपी डॉ. अशोक कुमार राय की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
🗣️ “सर्जरी की सहमति मिलने और ऑपरेशन होने के बीच 4-5 घंटे की देरी को डॉक्टर उचित रूप से नहीं समझा सके। इस देरी की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई।”
🏥 “बिना बुनियादी सुविधा चल रहे हैं नर्सिंग होम” – कोर्ट
कोर्ट ने दो टूक कहा कि:
🔴 “ऐसे डॉक्टर जो पूरी ईमानदारी और सावधानी से काम करते हैं, उन्हें कानून सुरक्षा देता है। लेकिन जो लोग बिना उचित सुविधा, योग्य स्टाफ और इन्फ्रास्ट्रक्चर के नर्सिंग होम खोलकर सिर्फ मुनाफा कमाने में लगे हैं, उन्हें संरक्षण नहीं मिल सकता।”
🔴 “निजी अस्पताल अब मरीजों के लिए केवल पैसा निकालने वाले एटीएम बन गए हैं।”
📜 केस का विवरण:
📌 स्थान: देवरिया, उत्तर प्रदेश
📌 तारीख: 29 जुलाई 2007
📌 प्रारंभिक घटना:
- शिकायतकर्ता के छोटे भाई की गर्भवती पत्नी को डॉ. राय के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।
- सुबह 11 बजे सर्जरी की सहमति दी गई, लेकिन ऑपरेशन शाम 5:30 बजे हुआ।
- तब तक भ्रूण की मृत्यु हो चुकी थी।
📌 आरोप:
- 8,700 रुपये वसूले गए और 10,000 रुपये अतिरिक्त मांगे गए।
- डिस्चार्ज स्लिप जारी करने से इनकार किया गया।
- विरोध करने पर परिजनों के साथ मारपीट भी की गई।
- इसके आधार पर जुलाई 2007 में एफआईआर दर्ज हुई।
🔍 ‘सरकारी कलम’ की विशेष टिप्पणी:
यह निर्णय न केवल चिकित्सा पेशे की गरिमा बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि उन लालची डॉक्टरों और झोलाछाप अस्पतालों के खिलाफ कड़ा संदेश है जो पैसे के लिए लोगों की ज़िंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं।
📝 क्या कहता है कानून?
भारत में मेडिकल नेग्लिजेंस (चिकित्सा लापरवाही) के मामलों में धारा 304A IPC के तहत कार्रवाई हो सकती है। यदि डॉक्टर की लापरवाही से किसी की मौत होती है तो यह एक गैर-इरादतन हत्या मानी जाती है।
📢 अगर आपके पास भी चिकित्सा लापरवाही से जुड़ी कोई कहानी है, हमें बताएं – ‘सरकारी कलम’ उसे न्याय की आवाज़ में बदल देगा।
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