मानव संपदा पर अधूरी फीडिंग बनी शिक्षामित्रों की राह की दीवार,समायोजन पर रुकावट पर   भड़कीं DG स्कूल शिक्षा BSA पर 🔥


📰 सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट

🗓 25 जुलाई 2025
✍️ लेखक: सरकारी कलम संपादकीय टीम


मानव संपदा पर अधूरी फीडिंग बनी शिक्षामित्रों की राह की दीवार, BSA पर भड़कीं DG स्कूल शिक्षा 🔥

एक तरफ सरकार शिक्षामित्रों को स्थायित्व देने के प्रयास में लगी है, तो दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही इस मिशन को लगातार पंगु बना रही है। प्रदेश के शिक्षामित्रों के तबादले और समायोजन को लेकर पहले ही शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हो चुके हैं, लेकिन ज़्यादातर जिलों के बीएसए (BSA) अभी तक नींद से नहीं जागे हैं।

🚨 निर्देश जारी, लेकिन अमल नदारद

जून महीने में स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने सभी बीएसए को सख्त निर्देश दिए थे कि शिक्षामित्रों का डाटा — जिसमें नाम, पहली तैनाती का विद्यालय, वर्तमान कार्यरत विद्यालय, जन्मतिथि व अन्य जानकारी — मानव संपदा पोर्टल पर तत्काल अपडेट की जाए। यह डाटा तबादले और समायोजन प्रक्रिया का मूल आधार है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से अधिकांश जिलों ने अभी तक यह काम पूरा नहीं किया।

📊 समीक्षा में खुली पोल, सिर्फ 6 जिले पास

हाल ही में हुई एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक में जब मानव संपदा पोर्टल की स्थिति पर नजर डाली गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया — सिर्फ छह जिलों ने ही शिक्षामित्रों का डाटा अपडेट किया है, बाकी सभी जिलों में काम या तो अधूरा है या शुरू ही नहीं हुआ। यह न सिर्फ प्रशासनिक असावधानी है, बल्कि शिक्षामित्रों के भविष्य के साथ एक सीधा खिलवाड़ भी है।

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⚡ DG कंचन वर्मा का फूटा ग़ुस्सा

समीक्षा में यह स्थिति देखकर स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा बेहद नाराज हुईं। उन्होंने इसे अधिकारियों के आदेशों की खुली अवहेलना और विभागीय ज़िम्मेदारी से भागने का संकेत बताया। उन्होंने चेताया कि 30 जुलाई तक हर हाल में यह डाटा अपडेट पूरा किया जाए — इसके बाद कोई भी अपडेट स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उनका यह सख्त संदेश था:

“यदि समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तो संबंधित बीएसए के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई तय है।”

👩‍🏫 शिक्षामित्रों में नाराजगी, सवालों की बौछार

शिक्षामित्रों में इस देरी को लेकर भारी नाराजगी है। कई जिलों में शिक्षामित्र पिछले कई महीनों से समायोजन की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन बार-बार की प्रशासनिक ढिलाई ने उनकी उम्मीदों को तोड़ कर रख दिया है। वे पूछ रहे हैं —

“जब आदेश समय पर हुए, तकनीक मौजूद है, फिर अड़चन सिर्फ लापरवाही क्यों?”

🎯


📢 अंतिम चेतावनी:

🗓 अंतिम तिथि: 30 जुलाई 2025
📍 अपडेट करें: मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षामित्रों का पूर्ण विवरण
📬 रिपोर्ट भेजें: राज्य परियोजना कार्यालय को


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