🏫 स्कूली पेयरिंग से बढ़ी दिव्यांग बच्चों की मुश्किलें, हाईवे-रेलवे क्रॉसिंग से होकर जाना पड़ रहा स्कूल
✍️ सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट | लखनऊ
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय स्कूलों के विलय (पेयरिंग) की प्रक्रिया छात्रों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बनती जा रही है। खासकर दिव्यांग बच्चों के लिए यह फैसला भारी पड़ रहा है। कई मामलों में दो से ढाई किलोमीटर दूर के स्कूलों को पेयर कर दिया गया है, जिनमें से कुछ के बीच नहर, रेलवे क्रॉसिंग या हाइवे जैसी खतरनाक बाधाएं हैं।
🔍 बिना जमीनी समीक्षा के की गई पेयरिंग?
बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों की पेयरिंग करते समय यह निर्देश दिया था कि बच्चों को तालाब, रेलवे क्रॉसिंग, हाइवे जैसी जगहों से होकर न गुजरना पड़े। साथ ही स्कूलों की दूरी एक किलोमीटर के भीतर होनी चाहिए थी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
📌 दिव्यांग बच्चों की हाजिरी और पढ़ाई दोनों प्रभावित
ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल आना-जाना पहले ही चुनौतीपूर्ण होता है। अब जब स्कूल विलय कर दूर भेजे जा रहे हैं, तो कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।
उदाहरण के लिए:
- प्राथमिक विद्यालय चतुरीखेड़ा में 32 छात्र हैं, जिनमें 5 दिव्यांग हैं। इसे 1.8 किमी दूर पीएस सिरगामऊ से पेयर किया गया है।
- पीएस गौरी, काकोरी के 3 दिव्यांग छात्र अब 2.5 किमी दूर कठिघरा जाना पड़ रहा है।
- गोसाईगंज के पीएस रामपुर न्यू के दिव्यांग छात्रों को भी दो किमी दूर गोमीखेड़ा जाना होता है।
🚨 खतरनाक रास्ते: हाईवे, क्रॉसिंग और नहर

🧑⚖️ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी
बेसिक शिक्षा विभाग की पेयरिंग नीति को लेकर लखनऊ हाई कोर्ट में कई अभिभावकों की अपीलें दाखिल हुई हैं।
- 7 जुलाई को हाई कोर्ट की एकल पीठ ने याचिकाएं खारिज कर दी थीं,
लेकिन अब दो जजों की खंडपीठ (मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह) में फिर से सुनवाई चल रही है।
अपीलकर्ताओं का तर्क:
“संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत हर बच्चे को सुलभ और सुरक्षित शिक्षा का अधिकार है। पेयरिंग से बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।”
📋 DM ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
डीएम विशाख जी ने बेसिक शिक्षा विभाग से कहा है कि:
✅ सभी पेयर किए गए स्कूलों की दूरी की कैटेगिरीवार लिस्ट बनाई जाए:
- 1 किमी तक
- 1–1.5 किमी
- 1.5–2 किमी
- 2 किमी से अधिक
✅ उन स्कूलों की अलग रिपोर्ट बनाई जाए:
- जिनमें ज्यादा छात्र थे, लेकिन उन्हें कम छात्र वाले स्कूलों में मर्ज कर दिया गया
- जिनमें रास्ते में नहर, क्रॉसिंग या हाइवे पड़ते हैं
🚸 क्या होगा आगे?
बेसिक शिक्षा विभाग अब भौतिक सत्यापन (Physical Verification) दोबारा करवा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां पेयरिंग सही नहीं है, वहां सुधार किया जाए।
इसके अलावा दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष नीति बनाना अब ज़रूरी हो गया है ताकि शिक्षा से कोई भी वंचित न रह जाए।
🗣️ “सरकारी कलम” की अपील
शिक्षा बच्चों का अधिकार है, लेकिन यह सुलभ, सुरक्षित और समावेशी होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि पेयरिंग करते समय केवल आंकड़ों को न देखे, बल्कि बच्चों की ज़िंदगी की जमीनी हकीकत को समझे।
📌 सरकारी स्कूलों की मजबूती ही भविष्य की नींव है।
