⚖️ प्राथमिक स्कूलों के विलय पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी, अगली तारीख 23 जुलाई तय
✍️ सरकारी कलम डेस्क | लखनऊ
प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के एकीकरण (विलय) के खिलाफ दायर की गई विशेष अपीलों पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में मंगलवार को लंबी बहस हुई। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के सामने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।
🧑⚖️ क्या है मामला?
सरकार द्वारा प्रदेश भर के कई प्राथमिक विद्यालयों को विलय कर पास के दूसरे स्कूलों से जोड़ने का आदेश जारी किया गया है। इस फैसले के खिलाफ कई जिलों से विरोध उठने के बाद सीतापुर जिले के 51 छात्रों समेत कई अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया।
इन याचिकाओं में कहा गया कि:
- छात्रों को बहुत दूर के स्कूलों में भेजा जा रहा है
- अभिभावकों के लिए बच्चों को लाना-ले जाना मुश्किल हो रहा है
- कई स्कूलों में पहुंचने के रास्ते खतरनाक हैं (जैसे रेलवे क्रॉसिंग, हाईवे, नहर इत्यादि)
- खासकर दिव्यांग बच्चों के लिए यह बेहद मुश्किल और असुरक्षित है
⚖️ एकल पीठ ने पहले ही खारिज कर दी थी याचिकाएं
इस मामले में 7 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट की एकल पीठ (न्यायमूर्ति पंकज भाटिया) ने याचिकाएं खारिज कर दी थीं। एकल पीठ ने यह माना कि संविधान के अनुच्छेद 21A (निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) के तहत राज्य की यह जिम्मेदारी तो है कि वह शिक्षा दे, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि स्कूल एक किलोमीटर के भीतर ही हो।
🆙 अब विशेष अपील खंडपीठ में
एकल पीठ के फैसले के खिलाफ अब याचिकाकर्ताओं ने विशेष अपीलें दायर की हैं, जिन पर सुनवाई अब खंडपीठ कर रही है।
🔹 मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से विस्तृत बहस की गई।
🔹 इसके जवाब में राज्य सरकार के वकीलों ने भी तर्क और न्यायिक उदाहरण (नजीरें) पेश कीं।
🔹 खंडपीठ ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 23 जुलाई 2025 नियत की है।
📌 निष्कर्ष
स्कूलों के विलय के खिलाफ प्रदेशभर में उठा जनविरोध अब न्यायपालिका के दरवाजे पर है। खंडपीठ का फैसला यह तय करेगा कि क्या सरकार का यह कदम शैक्षिक सुधार है या ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को खतरे में डालने वाला निर्णय।
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