🏫 सांसद संजय सिंह उठाएंगे परिषदीय विद्यालयों को बंद करने का मुद्दा, कहा – गरीब बच्चों की शिक्षा खतरे में
लखनऊ/नई दिल्ली।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों को बंद करने के फैसले को लेकर आवाज उठाई जाएगी।
📣 ‘विद्यालयों को संसाधन दो, ताले नहीं’
रविवार को जारी एक बयान में संजय सिंह ने कहा –
“राज्य सरकार का यह कदम गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के बच्चों के साथ अन्याय है। बेहतर संसाधन देने के बजाय स्कूलों को ताले लगाए जा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों को “पेयरिंग” या “विलय” के नाम पर बंद किया गया है, जिससे छात्रों को अब पढ़ाई के लिए 3–5 किलोमीटर या उससे भी अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। इसमें कई बार रेलवे क्रॉसिंग, हाइवे और अन्य जोखिमपूर्ण रास्तों को भी पार करना पड़ता है।
🚸 बच्चों की पढ़ाई पर असर, सुरक्षा भी संकट में
संजय सिंह ने दावा किया कि कई बच्चों ने खतरनाक रास्तों और दूरी की वजह से स्कूल जाना बंद कर दिया है, जिससे उनकी पढ़ाई अधर में लटक गई है। यह कदम शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) और समान शिक्षा की अवधारणा के विरुद्ध है।
🏛️ संसद में गूंजेगा आवाज
सांसद ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाएंगे, और मांग करेंगे कि सरकार गरीब और ग्रामीण बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा करे, न कि विद्यालय बंद करके उन्हें शिक्षा से दूर करे।
🧾 पृष्ठभूमि: क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश में कम नामांकन वाले 10,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर उन्हें पास के बड़े विद्यालयों में मर्ज (pair) किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, लेकिन कई सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने इसका विरोध किया है।
🗣️ “शिक्षा का अधिकार सभी को है। सरकार को चाहिए कि वह स्कूलों को बंद करने के बजाय उन्हें बेहतर बनाए।”
— संजय सिंह, सांसद, AAP
