सम्भल जिले ने किया ,200 छात्रों तक का विलय

है कि एक ही ग्राम में दो या अधिक विद्यालय होने के कारण सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों का मर्जर किया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ ऐसे विद्यालय भी मर्जर की सूची में हैं, जिनमें 200 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं, जैसे कि प्राथमिक विद्यालय भंडरिया (228 छात्र)। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
🖊 मर्जर की आड़ में शिक्षा पर कुठाराघात: 200 बच्चों वाले विद्यालय भी बंद!
✍️ सरकारी कलम डेस्क
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग की नई ‘पेयरिंग नीति’ के तहत ग्राम स्तर पर यदि दो या अधिक प्राथमिक विद्यालय हैं, तो उन्हें एक में मर्ज (विलय) किया जा रहा है। नीति की मंशा भले ही संसाधनों के बेहतर उपयोग की हो, लेकिन इस मर्जर की प्रक्रिया में ज़मीनी हकीकत की अनदेखी साफ दिख रही है।
📌 सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे स्कूल भी मर्ज कर दिए गए, जिनमें 200 से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
📉 क्या है इस नीति का असर?
- बच्चों पर सीधा असर: जब एक गांव में दो स्कूल मिलाए जाते हैं, तो एक स्कूल बंद कर दिया जाता है। इससे बच्चों को अब ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। छोटे बच्चों के लिए यह भारी परेशानी बनती जा रही है।
- 200+ छात्रों वाले विद्यालय बंद करना: उदाहरण के लिए प्रा.वि. भंडरिया, जहां 228 छात्र हैं, उसे भी मर्ज कर दिया गया। क्या यह बच्चों के शिक्षा अधिकार का हनन नहीं?
- शिक्षकों पर दबाव: छात्र संख्या तो बढ़ती है, लेकिन शिक्षक उतने ही रहते हैं या कम भी कर दिए जाते हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर गंभीर प्रश्न उठता है।
- संसाधनों की बर्बादी: पहले से ही बने भवन, फर्नीचर, शौचालय जैसे संसाधन अब बेकार हो जाएंगे।
⚠️ नीति या अव्यवस्था?
शिक्षा नीति बनाते समय अगर सिर्फ कागजों पर संख्या देखी जाए और ज़मीनी परिस्थितियों की अनदेखी की जाए, तो वही होता है जो आज हो रहा है — प्रभावी स्कूलों का गला घोंटना।
🙋♂️ शिक्षकों और अभिभावकों का आक्रोश
बेसिक शिक्षक संगठनों ने भी इस नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह एक प्रकार का “प्रशासनिक आलस्य” है, जो बिना क्षेत्र भ्रमण के, सिर्फ आंकड़ों के आधार पर स्कूलों को बंद कर रहा है।
🔴 सरकार को ज़मीन से जुड़कर निर्णय लेने की ज़रूरत है
शिक्षा कोई आंकड़ों का खेल नहीं, यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला है। 200 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों को मर्ज करना अकल्पनीय और असंवेदनशील निर्णय है।
❗ क्या सरकार यह मान रही है कि बच्चों को शिक्षा तक पहुंच से वंचित करना ‘सुधार’ कहलाता है?
🛑 सरकारी कलम स्पष्ट तौर पर इस नीति की निंदा करता है और सरकार से अपील करता है कि:
- जिन स्कूलों में 100 से अधिक छात्र हैं, उनका मर्जर रोका जाए।
- नीति को लागू करने से पहले हर ग्राम पंचायत का फील्ड सर्वे कराया जाए।
- छात्रों की सुविधा और शिक्षक अनुपात को प्राथमिकता दी जाए।
📢 यदि आप भी अपने क्षेत्र में हुए इस प्रकार के मर्जर से प्रभावित हैं, तो हमें लिख भेजें — www.sarkarikalam.com पर हम आपकी आवाज़ उठाएंगे।
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