📚 परिषदीय विद्यालयों के विलय पर मचा बवाल, अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी
✍️ रिपोर्ट: सरकारी कलम डेस्क | बहराइच/उन्नाव
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय स्कूलों को बंद कर अन्य विद्यालयों में मर्ज किया जा रहा है। इस फैसले ने अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असंतोष की लहर पैदा कर दी है।
📍 नवाबगंज ब्लॉक में 14 स्कूल हुए मर्ज
उन्नाव के नवाबगंज ब्लॉक में पहले चरण में 14 परिषदीय स्कूलों को बंद कर उनके छात्रों और शिक्षकों को पास के बड़े विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया है। बंद किए गए स्कूलों में पलटन पूरवा, सुकईगांव, खटीकन गांव, खुशली पूरवा, परमपुर, बरकतपुर जैसे विद्यालय शामिल हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी राधेश्याम वर्मा ने बताया कि सभी शिक्षकों को आदेश देकर पास के विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है।
🚸 अभिभावकों की परेशानी: बच्चों को तय करनी पड़ रही लंबी दूरी
गांव के अभिभावकों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों को अब दूर के स्कूलों में भेजना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
👨👩👧👦 विजय कुमार, रामकुमार शर्मा व अन्य अभिभावकों ने चिंता जताई कि यह कदम गरीब वर्ग के बच्चों को शिक्षा से दूर करने वाला है।
🛑 कैसरगंज में विरोध: मंदिर परिसर में शिक्षक संघ की बैठक
कैसरगंज विकास खंड में भी 16 विद्यालयों को मर्ज कर बंद किया जा रहा है। इस पर प्राथमिक शिक्षक संघ ने विरोध जताते हुए मंदिर परिसर में एक बैठक की।
🔈 ब्रजेंद्रनाथ (अध्यक्ष) और कृपाशंकर दुबे (उपाध्यक्ष) ने बैठक का संचालन करते हुए सरकार के फैसले को छात्र विरोधी नीति करार दिया।
❗ क्या बोले शिक्षक और पंचायत प्रतिनिधि?
🗣️ प्रमुख वक्तव्य:
“50 से कम नामांकन वाले विद्यालयों को बंद कर अन्य स्कूलों से जोड़ना शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन है। यह फैसला गरीब बच्चों की शिक्षा पर सीधा हमला है।“
— महेन्द्रपाल सिंह (मंत्री), पंकज मिश्रा (संयुक्त मंत्री), शिक्षक संघ
📌 सरकारी कलम की टिप्पणी:
📢 विद्यालयों को मर्ज करने की योजना अगर व्यवहारिक धरातल पर नहीं उतारी जाती तो इससे बुनियादी शिक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है। छोटे बच्चों के लिए दूरी, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव बेहद मायने रखते हैं। शिक्षा विभाग को चाहिए कि ग्रामीण परिवेश और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखकर ही निर्णय ले।
📚 “विद्यालय बंद, शिक्षा मंद?” – यह सवाल अब हर गांव में गूंज रहा है।
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