कक्षा 8 के छात्रों के लिए “आर्ट एजुकेशन” विषय को अनिवार्य

आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए नई अनिवार्य विषय “आर्ट एजुकेशन” – भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की पहल
(शैक्षिक सत्र 2025-26 से लागू)


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF) को मूर्त रूप देते हुए एनसीईआरटी (NCERT) ने कक्षा 8 के छात्रों के लिए “आर्ट एजुकेशन” विषय को अनिवार्य कर दिया है। इस विषय की पढ़ाई 2025-26 सत्र से पूरे देश के स्कूलों में अनिवार्य रूप से करवाई जाएगी।

Table of Contents

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📘 क्या है ‘कृति’ पाठ्यपुस्तक?

इस विषय के लिए एनसीईआरटी ने विशेष पुस्तक “कृति” तैयार की है, जिसमें थियेटर, म्यूजिक, डांस-मूवमेंट और विजुअल आर्ट के चार मुख्य आयामों को शामिल किया गया है। पुस्तक में कुल 19 अध्याय होंगे।


🎭 मुख्य विषय और उनके भावार्थ

  1. 🎶 संगीत और नृत्य:
    • भक्ति आंदोलन के संतों जैसे मीराबाई, तुलसीदास, कनकदास और स्वामी हरिदास के भजनों को शामिल किया गया है।
    • सूफी परंपरा के गायक-संतों जैसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और बाबा फरीद के सूफी संगीत को स्थान मिला है।
    • भारत के विभिन्न राज्यों की लोक धुनें और पारंपरिक नृत्य बच्चों को सिखाए जाएंगे।
  2. 🎭 नाटक और रंगमंच:
    • भरत मुनि के नाट्यशास्त्र और अभिनव गुप्त की अभिनवभारती की चर्चा।
    • शांति रस सहित नौ रसों की समझ।
    • रंगमंचीय प्रस्तुतियों, संवाद, दृश्य और अभिनय पर प्रशिक्षण।
  3. 🎨 दृश्य कला (Visual Arts):
    • चित्रकला, मूर्तिकला, कोलाज, रंगों की मनोविज्ञानिक समझ।
    • पारंपरिक कला रूप जैसे मधुबनी, वारली, कलाईगाट आदि को जानने का अवसर।
  4. 🪕 ताल और वाद्ययंत्र:
    • कोन्नाकोल, सोलकट्टू, सरस्वती वंदना, भारतीय वाद्ययंत्रों की जानकारी।
    • संगीत की विभिन्न विधाएं – एकल और समूह गायन/वादन।

📚 क्यों जरूरी है यह बदलाव?

  • बच्चों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामूहिकता से जोड़ने का प्रयास।
  • आर्ट एजुकेशन बच्चों के भावनात्मक विकास, रचनात्मकता, और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करेगा।
  • यह पाठ्यक्रम सिर्फ सैद्धांतिक नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल और प्रदर्शनी आधारित होगा, जिसमें बच्चों को स्वयं प्रस्तुतियां देने का मौका मिलेगा।

🔍 निष्कर्ष:

कृति” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारत की कला, संस्कृति और संगीत से जुड़ने का एक जीवंत पुल है। इससे न केवल बच्चे कला की समझ विकसित करेंगे, बल्कि अपने भीतर के कलाकार को भी पहचानेंगे।


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