बुधवार को पूरे उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह आंदोलन न केवल पुरानी पेंशन बहाली की माँग को लेकर था, बल्कि शिक्षा, रोजगार और श्रम अधिकारों से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों को भी केंद्र में लाया गया।
📍 प्रदर्शन का मुख्य केंद्र: लखनऊ, हजरतगंज
हजारों कर्मचारियों ने हजरतगंज में कर्मचारी नेता बीएन सिंह की प्रतिमा के समक्ष एकत्र होकर नारेबाजी की और सरकार को चेतावनी दी कि अगर माँगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
📌 प्रदर्शन में उठाई गईं प्रमुख माँगें:
- 🧓 पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली
- कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना (NPS) असुरक्षित है और रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी नहीं देती।
- 🧑🏫 प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर का विरोध
- शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) की भावना के खिलाफ बताते हुए मर्जर नीति को रद्द करने की माँग।
- 🧑🔧 आउटसोर्स/संविदा कर्मियों का स्थायीकरण
- वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों को स्थायी कर्मचारी बनाने की माँग।
- 💡 बिजली का निजीकरण रोकने की माँग
- ऊर्जा विभाग के निजीकरण से कर्मचारियों की नौकरी और उपभोक्ताओं की जेब दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
- 📉 रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो
- सभी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को भरने की माँग।
- 💰 आठवां वेतन आयोग (Pay Commission)
- नए वेतन आयोग की अधिसूचना जल्द जारी की जाए।
- 🧑🏭 चार लेबर कोड्स को रद्द किया जाए
- श्रमिक विरोधी बताए गए इन लेबर कोड्स को खत्म करने की पुरज़ोर माँग।
🎙️ प्रमुख वक्ताओं के बयान:
- एस.पी. सिंह (संरक्षक) ने कहा –
“यह सिर्फ पेंशन की लड़ाई नहीं, बल्कि कर्मचारी अस्मिता और सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई है।” - कमलेश मिश्रा व नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा –
“सरकार अगर कर्मचारियों की अनदेखी करती रही, तो हम विधान सभा का घेराव करेंगे।”
🧑🤝🧑 आंदोलन में प्रमुख चेहरे:
अफीफ सिद्दीकी, परमेश्वर सिंह, संदीप पांडेय, मंसूर अली, रंजीत कुमार, राम भजन मौर्य समेत कई जिलों से कर्मचारी प्रतिनिधि जुटे।
🔍 विश्लेषण:
इस आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि कर्मचारियों की असहमति केवल पेंशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी नीतियों की नींव पर उठाए गए सवाल हैं। विशेष रूप से विद्यालयों के मर्जर, बिजली का निजीकरण और संविदा नीति जैसे मुद्दे सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रहे हैं।
📢 संभावित परिणाम:
यदि सरकार इन माँगों पर विचार नहीं करती है तो आगामी विधानसभा सत्र, विधान सभा घेराव, और राज्यव्यापी हड़ताल जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
