🎓 बाल वाटिकाओं में शिक्षा के साथ माताओं का प्रशिक्षण भी ज़रूरी 📘
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की परवरिश के साथ माताओं को भी मिल रहा प्रशिक्षण
👩👧👦 माताएं बनेंगी बच्चों की पहली शिक्षक!
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अब केवल बच्चों को नहीं,
उनकी माताओं को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि माताएं बच्चों की
परवरिश, पोषण और शिक्षा को और बेहतर ढंग से समझ सकें। इस कार्यक्रम को
बाल वाटिका अभियान के रूप में राज्यभर में लागू किया जा रहा है।
🏫 70,494 विद्यालयों में 95 हज़ार से अधिक बाल वाटिकाएं संचालित
राज्य के 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में से 96 लाख बच्चों को जोड़ने की दिशा में
‘निपुण भारत मिशन’ कार्यरत है। इनमें से 70,494 विद्यालयों में बाल वाटिकाएं
शुरू की गई हैं, जिनका संचालन प्राथमिक शिक्षकों व प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है।
प्रशिक्षण हेतु विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं और माताओं को इन मॉड्यूल्स के जरिए घर पर शिक्षा
जारी रखने के गुर सिखाए जा रहे हैं।
🧠 बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ज़ोर
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को तीन से छह वर्ष की उम्र में ही
शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व भावनात्मक विकास के सही रास्ते पर लाना है। इसीलिए
शिक्षकों के साथ-साथ माताओं को भी खेल, गीत, गतिविधि, कहानी व रचनात्मक शिक्षण
की जानकारी दी जा रही है।
🎁 2 अक्टूबर से कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण और समाज कल्याण विभाग की बैठक में निर्णय लिया गया है कि
2 अक्टूबर 2025 से कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति
प्रदान की जाएगी। छात्रवृत्ति के लिए पात्रता, प्रमाणपत्र और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
📅 एकीकृत योजना के तहत मिलेगा लाभ
अब तीनों विभागों द्वारा छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को एकीकृत पोर्टल से जोड़ा जाएगा,
जिससे आवेदन में पारदर्शिता और सरलता आएगी। साथ ही, दिसंबर से ही ऑनलाइन आवेदन की
सुविधा भी शुरू हो जाएगी। शासन का उद्देश्य है कि छात्रों को समय से छात्रवृत्ति मिले और कोई
वंचित न रहे।
💡 निष्कर्ष
बाल वाटिकाएं अब केवल बच्चों की शिक्षा का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि वे माताओं के सशक्तिकरण और
समग्र विकास का केंद्र बन रही हैं। वहीं, छात्रवृत्ति योजना से
हज़ारों छात्रों को लाभ मिलेगा और उनकी शिक्षा यात्रा को नया संबल मिलेगा।
