☀️ भीषण गर्मी के बीच स्कूल खोलने पर शिक्षकों ने जताई आपत्ति, छुट्टियाँ बढ़ाने की उठी मांग
लखनऊ, 12 जून 2025: उत्तर भारत में जारी भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच अब स्कूलों को निर्धारित तिथि (16 जून) से खोलने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शिक्षक संगठनों ने इसे बच्चों और शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए स्कूलों की छुट्टियाँ बढ़ाकर 1 या 30 जून तक करने की मांग की है।
📜 मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों को भेजा गया ज्ञापन
बृहस्पतिवार को शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा को पत्र भेजकर अपनी चिंता प्रकट की।
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह और महामंत्री आशुतोष मिश्र ने अपने ज्ञापन में कहा:
“उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती और संसाधनों की कमी के बीच 16 जून से विद्यालय खोलना, बच्चों व शिक्षकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होगा। विद्यालयों को 1 जुलाई से ही संचालित किया जाना चाहिए।”
🔥 गर्मी और लू से जनजीवन बेहाल
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित पूरे उत्तर भारत में इन दिनों तापमान 45 से 47 डिग्री तक पहुंच चुका है। यूपी के कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में छात्रों का स्कूल आना-जाना और विद्यालय में ठहराव दोनों ही जोखिमपूर्ण माने जा रहे हैं।
📣 शिक्षकों की सामूहिक मांग – “छुट्टियाँ बढ़ाओ”
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री आलोक सिंह यादव और शिक्षक नेता प्रकाश साहू ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा और बेसिक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजते हुए कहा:
“भीषण गर्मी और लू के चलते अगर 16 जून से विद्यालय खोले गए तो यह बच्चों और शिक्षकों दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। ऐसे में 30 जून तक अवकाश बढ़ाया जाए।”
📌 क्या कहता है मौसम विभाग?
मौसम विभाग के अनुसार अगले 5 से 7 दिन तक तापमान में कोई खास गिरावट नहीं आने वाली है। लू की स्थिति बनी रहेगी और विशेष रूप से दोपहर के समय घर से बाहर निकलना खतरनाक साबित हो सकता है।
🔍 निष्कर्ष
शिक्षक संगठनों की यह मांग केवल सुविधा के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए उठाई जा रही है। सरकार को चाहिए कि वह मौसम की गंभीरता, मेडिकल सलाह और ज़मीनी हालातों को देखते हुए एक मानवीय निर्णय ले और परिषदीय विद्यालयों की छुट्टियों को यथासंभव विस्तारित करे।
