सेटेलाइट से सीधे लिंक होकर मोबाइल पर चलेगा इंटरनेट






सेटेलाइट से सीधे लिंक होकर मोबाइल पर चलेगा इंटरनेट


सेटेलाइट से सीधे लिंक होकर मोबाइल पर चलेगा इंटरनेट

सेटेलाइट इंटरनेट एक अलग टेक्नोलॉजी है। वर्तमान में इंटरनेट मोबाइल टावर और फाइबर ऑप्टिक के जरिए पहुंचाया जाता है, लेकिन सेटेलाइट इंटरनेट में तार की कोई जरूरत नहीं होती। इसमें मोबाइल फोन सीधे सेटेलाइट से कनेक्ट रहेगा। यह सेटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा जो पृथ्वी से 160 से 2000 किमी ऊंचाई पर चक्कर लगाएगा।

कितना सेवा शुल्क होगा?

दूसरी कंपनियों की तुलना में फिलहाल स्टारलिंक सर्विस महंगी है। इसका मासिक शुल्क लगभग ₹7500 है, जबकि डिवाइस की कीमत ₹75,000 तक हो सकती है। हालांकि, भविष्य में प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विकास से कीमतें कम होने की संभावना है।

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4G/5G से कैसे अलग?

4G और 5G मोबाइल नेटवर्क टावर पर आधारित होते हैं, जबकि सेटेलाइट इंटरनेट में डायरेक्ट सेटेलाइट से कनेक्टिविटी मिलती है। इस कारण यह तकनीक दूरदराज क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है जहां टावर लगाना मुश्किल होता है।

इंटरनेट की स्पीड क्या होगी?

स्टारलिंक के जरिए 100 एमबीपीएस तक की स्पीड मिल सकती है। जीपीएस की तरह ही लो लेटेंसी नेटवर्क मिलता है, जिससे ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं आसानी से मोबाइल पर मिल सकेंगी।

शहरी और ग्रामीण इलाकों में उपलब्धता

जहां मोबाइल टावर नहीं हैं, वहां सेटेलाइट सेवा वरदान साबित होगी। खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में जहां फाइबर बिछाना संभव नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में भी यह इंटरनेट सुचारू रूप से कार्य करेगा।

क्या सेवा गांवों में मिलेगी या शहरों में भी?

सेवा केवल गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी उपलब्ध होगी। जहां नेटवर्क नहीं है, वहां इसका सर्वाधिक लाभ मिलेगा।

इंस्टॉलेशन शुल्क

फिलहाल इंस्टॉलेशन किट के साथ यह सेवा शुरू की जा रही है। इसमें एक टर्मिनल, राउटर और पावर सप्लाई होता है। ग्राहक स्वयं भी इंस्टॉल कर सकते हैं।

भारत में डिजिटल इंडिया को क्या फायदा होगा?

  • डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
  • टेलिमेडिसिन की सेवाएं पहुंचेंगी गांवों तक।
  • सरकारी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा।
  • ई-कॉमर्स और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों तक पहुंचेगी।

सुरक्षा पर सहमति

सुरक्षा को देखते हुए स्टारलिंक जैसी सेवाओं को भारत सरकार की मंजूरी जरूरी है। भारत ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है कि डेटा भारत में ही स्टोर हो और यह सेवा रक्षा क्षेत्र में बिना अनुमति उपयोग न हो।

इस तरह इस्तेमाल

मोबाइल की तरह ही एक विशेष टर्मिनल डिवाइस को खुले स्थान पर रखना होगा। यह सेटेलाइट सिग्नल को कैच कर इंटरनेट सेवा प्रदान करेगा। टर्मिनल की मदद से मोबाइल फोन या अन्य डिवाइसों में Wi-Fi के माध्यम से इंटरनेट चल सकेगा।


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