UP Board स्क्रूटनी 2025: संदेहास्पद उत्तर पुस्तिकाओं की होगी फॉरेंसिक जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने वर्ष 2025 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की स्क्रूटनी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और कड़ाई के साथ संपन्न कराने की ठानी है। इस बार यदि उत्तर पुस्तिकाओं में कोई संदेहास्पद गतिविधि पाई जाती है, तो उन्हें केवल विषय विशेषज्ञों के हवाले नहीं किया जाएगा, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी।
यह फैसला बोर्ड के सचिव भगवती प्रसाद सिंह द्वारा लिया गया है, जिन्होंने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
क्या है स्क्रूटनी और क्यों जरूरी है इसकी पारदर्शिता?
बोर्ड के सचिव ने स्पष्ट किया है कि स्क्रूटनी का अर्थ पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) नहीं होता। इसमें परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में केवल यह देखा जाता है:
- कहीं कोई प्रश्न अमूल्यांकित तो नहीं रह गया?
- योग (total) में कोई त्रुटि तो नहीं हुई?
- अंकों का सही फॉरवर्डिंग हुई है या नहीं?
हालांकि, यदि किसी उत्तर पुस्तिका में संदेहास्पद ओवरराइटिंग, स्याही में अंतर, या कृत्रिम रूप से अंकों की वृद्धि जैसी गतिविधियाँ पाई जाती हैं, तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
फॉरेंसिक जांच और कड़ी कार्रवाई – अब कोई चूक नहीं चलेगी!
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उत्तर पुस्तिका में हेरफेर की पुष्टि होती है, तो उसके मूल्यांकनकर्ता यानी परीक्षक के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, ऐसी उत्तर पुस्तिकाओं को:
- विषय विशेषज्ञों द्वारा दोबारा जांचा जाएगा।
- संदिग्ध पाए जाने पर फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा।
- परीक्षा की गणक पंजिका (Mark Ledger) से मिलान कर फिर ‘नो चेंज’ निर्णय लिया जाएगा।
‘नो चेंज’ से पहले हर स्तर पर जांच अनिवार्य
पिछले वर्षों में कुछ मामलों में न्यायालय में उत्तर पुस्तिका पेश करने से पहले उचित जांच नहीं हुई, जिससे बोर्ड की छवि को नुकसान पहुंचा। इसलिए इस बार सचिव ने सख्त निर्देश दिए हैं कि:
- कोई भी उत्तर पुस्तिका ‘नो चेंज’ श्रेणी में डालने से पहले उसकी गणक पंजिका से मिलान अवश्य किया जाए।
- उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी का रिकॉर्ड सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में सुरक्षित रखा जाएगा।
- बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश सख्त वर्जित होगा।
विषय विशेषज्ञों की मदद से होगी जांच, 15 जून तक भेजनी होंगी रिपोर्ट
स्क्रूटनी प्रक्रिया के दौरान जिन उत्तर पुस्तिकाओं में विसंगति मिलती है, उनके निराकरण के लिए:
- राजकीय विद्यालयों के योग्य विषय विशेषज्ञों को सन्निरीक्षक नियुक्त किया जाएगा।
- जिन उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों की वृद्धि होगी, उन्हें क्षेत्रीय सचिव द्वारा भी देखा जाएगा।
- सभी संशोधित उत्तर पुस्तिकाएँ 15 जून 2025 तक सील बंद लिफाफे में भेजनी होंगी, ताकि बोर्ड सचिव से अंतिम अनुमोदन लिया जा सके।
स्क्रूटनी की अंतिम तिथि और परिणाम कब?
- स्क्रूटनी के लिए अंतिम आवेदन तिथि तय कर दी गई है।
- प्राप्त आवेदनों के आधार पर चार सदस्यीय टीमों का गठन किया जाएगा जिसमें उप सचिव, सहायक सचिव व प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।
- प्रत्येक सदस्य को उत्तर पुस्तिकाओं की एक निर्धारित संख्या सौंपी जाएगी।
- स्क्रूटनी का परिणाम 15 जुलाई 2025 तक घोषित किया जाएगा।
टेक्नोलॉजी और निगरानी से पारदर्शिता की ओर कदम
बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित किया है कि:
- स्क्रूटनी कक्ष में CCTV कैमरों की 24×7 निगरानी हो।
- पूरी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
निष्कर्ष
UP Board की यह पहल न केवल परीक्षा की निष्पक्षता को बरकरार रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह उन छात्रों के लिए भी राहत की खबर है जिन्हें संदेह था कि उनके उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही नहीं हुआ। अब न कोई गलती छुपेगी, न कोई हेरफेर बचेगा।
“पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही” – यही इस नई स्क्रूटनी प्रक्रिया की पहचान है।
