69000 शिक्षक भर्ती: आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने CJI को भेजा पत्र, सुप्रीम कोर्ट से की जल्द सुनवाई की मांग
नई दिल्ली/लखनऊ –
उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद में फंसे अभ्यर्थियों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। शुक्रवार को अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई को पत्र भेजकर इस मामले की शीघ्र सुनवाई और निर्णय की मांग की है।
क्या है मामला?
- 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नीति के अनुपालन को लेकर विवाद शुरू हुआ था।
- लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में निर्णय दिया, जिसे 24 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
- तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अब तक अंतिम सुनवाई या निर्णय नहीं हो पाया है।
किन्होंने उठाई आवाज?
पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के
- प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप
- प्रदेश संरक्षक भास्कर सिंह
ने बताया कि हजारों अभ्यर्थी इस मामले की वजह से भर्ती प्रक्रिया से बाहर हैं और आजीविका तथा करियर का संकट झेल रहे हैं।
क्या चाहते हैं अभ्यर्थी?
- सुप्रीम कोर्ट मामले को शीघ्र सूचीबद्ध (list) करे
- जल्द से जल्द फैसला सुनाया जाए, जिससे चयन प्रक्रिया पर बना असमंजस समाप्त हो
- आरक्षण के तहत चयनित अभ्यर्थियों को न्याय मिले
संकट में हैं भविष्य और परिवार
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से संघर्षरत हैं। न तो नियुक्ति हो रही है और न ही स्थिरता का कोई भरोसा है। अब उन्हें केवल न्यायपालिका से उम्मीद है।
निष्कर्ष
69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद का समाधान अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिका है। अभ्यर्थियों की मांग है कि मामले की संवेदनशीलता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए शीघ्र सुनवाई और अंतिम निर्णय दिया जाए, जिससे लंबे समय से रुकी न्याय प्रक्रिया को गति मिल सके।
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