केवल लंबित आपराधिक केस नियुक्ति में बाधा नहीं: हाईकोर्ट ने SDM पद के लिए याची को दी राहत
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला केवल लंबित होने के आधार पर उसे सरकारी पद पर नियुक्त करने से रोका नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने यह टिप्पणी विशाल सारस्वत की अपील पर सुनवाई करते हुए की।
पीसीएस 2019 टॉपर को एसडीएम पद पर नहीं मिली थी नियुक्ति
विशाल सारस्वत, जो पीसीएस 2019 में टॉपर रहे थे, उन्हें एसडीएम पद पर नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था क्योंकि उनके खिलाफ एक पारिवारिक विवाद में एफआईआर दर्ज है। याची के बड़े भाई की पत्नी ने वर्ष 2017 में घरेलू हिंसा के तहत एफआईआर कराई थी, जिसमें विशाल भी नामजद थे। मामला अभी अदालत में लंबित है।
एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी
पहले, एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति न दिए जाने के आदेश को सही ठहराया था। इसके विरुद्ध विशाल सारस्वत ने खंडपीठ में अपील दायर की, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि –
“सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि याची सरकारी सेवा के लिए अयोग्य है।”
“एसडीएम का पद जिम्मेदारी वाला जरूर है, लेकिन इससे अधिक जिम्मेदार पदों पर भी याची पहले से कार्यरत है, जैसे कि रक्षा संपदा सेवा के अंतर्गत मुख्य कार्यकारी अधिकारी।”
सरकार को दिया पुनर्विचार का निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व आदेश पर पुनर्विचार करते हुए दो महीने के भीतर नया और न्यायोचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
बैंक कैशियर को भी हाईकोर्ट से मिली राहत
इसी के साथ, हाई कोर्ट ने धोखाधड़ी के आरोपित बैंक कैशियर उमंग शर्मा के खिलाफ चल रही केस की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है। मेरठ में एक पारिवारिक विवाद के कारण उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसमें उन पर फर्जी हस्ताक्षर से धन निकासी का आरोप है। कोर्ट ने राज्य सरकार व बैंक से जवाब मांगा है।
निष्कर्ष:
यह फैसला उन तमाम योग्य उम्मीदवारों के लिए आशा की किरण है जो झूठे या विवादित आपराधिक मामलों के कारण सरकारी सेवा से वंचित हो रहे हैं। कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी की उपयुक्तता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
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