इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पिता की पेंशन पर नौकरी पाने के बाद छोटी बहन को मिलेगी पारिवारिक पेंशन
✍️ रिपोर्ट: सरकारीकलम डॉट कॉम | मेरठ ब्यूरो
इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि दिवंगत कर्मचारी की संतान को अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी हो, तो परिवार के अन्य पात्र सदस्य को पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।
यह निर्देश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने मेरठ निवासी स्वाति की याचिका पर सुनाया।
क्या है मामला?
- स्वाति के पिता, गोपाल कृष्ण, मेरठ के जिला निर्वाचन कार्यालय में चपरासी पद पर कार्यरत थे।
- 15 मार्च 2011 को उनका निधन हो गया।
- उनकी पहली पत्नी अनीता से 2001 में तलाक हो चुका था।
- तलाक के बाद दो संतानें – स्वाति और उसका छोटा भाई राहुल, मां के साथ रहने लगे, जबकि बड़ी बहन चारु पिता के साथ रह रही थी।
चारु को मिली थी नौकरी, पेंशन हुई थी बंद
- पिता की मृत्यु के बाद चारु को पारिवारिक पेंशन दी गई।
- 2013 में चारु को अनुकंपा नियुक्ति के तहत जिला निर्वाचन कार्यालय, मेरठ में कनिष्ठ लिपिक बना दिया गया।
- इसके बाद उसकी पेंशन बंद कर दी गई।
स्वाति ने मां और भाई के भरण-पोषण के लिए मांगी पेंशन
- याची स्वाति ने कोर्ट में दलील दी कि वह अविवाहित है और अपने छोटे भाई की देखभाल कर रही है।
- उसने पारिवारिक पेंशन का अधिकार मांगा, ताकि भाई की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
कोर्ट ने दिया पेंशन देने का आदेश ✅
- कोर्ट ने यह मानते हुए कि चारु को पहले ही नौकरी मिल चुकी है, आदेश दिया कि स्वाति को पारिवारिक पेंशन दी जाए।
- कोर्ट ने कहा, “यदि एक आश्रित को नौकरी मिल चुकी है, तो दूसरे योग्य आश्रित को पेंशन का हक मिलना चाहिए।”
न्यायिक फैसला क्यों है अहम?
- यह फैसला उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनमें एक ही आश्रित को नौकरी मिली हो और अन्य सदस्य वंचित रह जाते हैं।
- तलाकशुदा स्थिति, अलग-अलग रहन-सहन और आश्रित बच्चों की स्थिति को समान संवेदनशीलता से देखने की जरूरत पर कोर्ट ने जोर दिया।
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