बीटेक डिग्री अब बीएससी के समकक्ष, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला ⚖️📘


बीटेक डिग्री अब बीएससी के समकक्ष, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला ⚖️📘

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बीटेक (B.Tech) की डिग्री को बीएससी (B.Sc) के समकक्ष माना जा सकता है। हालांकि, वर्तमान एआरपी (Academic Resource Person) भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, इसलिए याची को उसमें कोई राहत नहीं दी जा सकती। लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगली भर्तियों में बीटेक धारक आवेदन कर सकेंगे। ✅🎓

क्या था मामला?
संबंध उत्तर प्रदेश के संभल जिले के प्रशांत कुमार से है, जो वर्तमान में एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने एआरपी गणित पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि बीटेक डिग्री बीएससी के समकक्ष नहीं है। ❌

याचिकाकर्ता की दलील:
प्रशांत कुमार के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट में बताया कि बीटेक कोर्स में इंजीनियरिंग फिजिक्स, केमिस्ट्री, और मैथेमैटिक्स जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं, जो बीएससी के समकक्ष हैं। ⚙️📐📊

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कोर्ट का फैसला:

  • भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए वर्तमान केस में राहत नहीं दी जा सकती।
  • भविष्य की भर्तियों में बीटेक डिग्री को भी मान्यता मिलेगी। 📝
  • विभाग को निर्देश दिया गया कि आगामी विज्ञापनों में बीटेक को मान्य योग्यता के रूप में जोड़ा जाए। 🏛️

दूसरा फैसला: मृतक आश्रित की नियुक्ति में विभाग जिम्मेदार 🧾🧑‍⚖️

हाईकोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में कहा कि मृतक आश्रित नियुक्ति में दस्तावेजों का सत्यापन विभाग की जिम्मेदारी है, न कि याची की।

क्या था मामला?
याची राहुल के पिता की मृत्यु 2008 में सेवा के दौरान हुई थी। राहुल ने परिवार रजिस्टर और अनापत्ति प्रमाणपत्र के साथ नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिस पर उसे नियुक्ति मिल गई। लेकिन कुछ वर्षों बाद यह कहते हुए उसे सेवा से हटा दिया गया कि उसकी मां भी सरकारी नौकरी में हैं और यह तथ्य उसने छिपाया। 😟

कोर्ट का निर्देश:

  • यदि आवेदन फॉर्म में मां की नौकरी का कॉलम नहीं था, तो जानकारी छिपाने की बात गलत है।
  • राहुल को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए और बकाया वेतन दिया जाए। 👨‍💼✅

निष्कर्ष:
यह दोनों फैसले उन युवाओं के लिए राहत भरे हैं जो तकनीकी डिग्री के बावजूद सरकारी नौकरियों से वंचित हो रहे थे। साथ ही, यह विभागों को भी सतर्क करता है कि वे दस्तावेजों की जांच सही तरीके से करें। 📚⚠️

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