समर्थ पोर्टल बना शिक्षकों के लिए सिरदर्द, प्रमोशन और वेतन पर संकट
15 मई तक न भरने पर वेतन रोकने की चेतावनी, शिक्षक संगठन ने जताया विरोध
लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट — प्रदेश के राजकीय और एडेड महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया इस बार समर्थ पोर्टल की जटिलताओं में उलझ गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से 64 कॉलम में लगभग 170 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और उनसे जुड़े दस्तावेज अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, जिससे शिक्षक परेशान और नाराज़ हैं।
क्या है मामला?
- 1 अक्टूबर 2024 तक पदोन्नति के पात्र शिक्षकों की प्रक्रिया ऑफलाइन होगी, इसके बाद की प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जाएगी।
- विभाग ने शिक्षकों से पीएचडी, अनुभव, प्रशासनिक कार्य, शोध कार्य, गाइडेंस, प्रकाशन जैसे सभी रिकॉर्ड व सर्टिफिकेट डिजिटल फॉर्म में अपलोड करने को कहा है।
- कई सेवानिवृत्त होने के निकट शिक्षकों से भी पुराने प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं।
शिक्षकों की आपत्तियाँ
- पूर्व में सभी जानकारी विभाग को दी जा चुकी है, फिर से अपलोड करवाना अनुचित और बोझिल है।
- परीक्षा संचालन में व्यस्त शिक्षकों के पास इतनी भारी-भरकम सूचना भरने का समय नहीं है।
- पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं (जैसे स्लो सर्वर, डेटा सेव न होना) शिक्षक-प्राचार्यों के लिए और कठिनाई पैदा कर रही हैं।
संभावित संकट
- 15 मई तक सूचना अपलोड न करने पर वेतन रोके जाने की चेतावनी ने शिक्षकों में आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी को जन्म दिया है।
- 331 एडेड व 141 राजकीय महाविद्यालयों के 15,000 से अधिक शिक्षक इससे प्रभावित हैं।
शिक्षक संगठन का रुख
फुपुक्टा के संयुक्त मंत्री डॉ. गंगेश दीक्षित ने कहा:
“दिन भर परीक्षा ड्यूटी में व्यस्त शिक्षकों से इतना डेटा अपलोड कराना असंभव है। विभाग के पास पहले से रिकॉर्ड मौजूद हैं, उन्हें खुद पोर्टल पर अपडेट करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि यदि जून तक ऑफलाइन प्रमोशन की छूट नहीं दी गई, तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा।
निष्कर्ष:
समर्थ पोर्टल की तकनीकी और प्रक्रियात्मक जटिलताएं शिक्षा व्यवस्था को बार-बार बाधित कर रही हैं—चाहे वो परीक्षा हो, प्रवेश या अब पदोन्नति। सरकार यदि समय रहते शिक्षक संगठनों की बात नहीं सुनती, तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था व्यापक अव्यवस्था की शिकार हो सकती है।
