[बेसिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग बच्चों के हक पर डाका!]
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को किया नजरअंदाज़, अयोग्य विशेष शिक्षक कर रहे बच्चों को शिक्षित!
उत्तर प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर संकट गहराता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग ने विशेष शिक्षकों की नियुक्ति में मनमानी कर डाली।
क्या है मामला?
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि विशेष शिक्षकों की डिग्री, दक्षता और योग्यता की जाँच राज्य आयुक्त (दिव्यांगजन) की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय समिति से कराई जाए।
- लेकिन विभाग ने कोर्ट के आदेश के विपरीत चहेते अफसरों की समिति बना दी!
- परिणाम: 2300 में से 25% से अधिक शिक्षक अपात्र, फिर भी हर साल नवीनीकरण।
जमीनी हकीकत:
- लगभग 3 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चे (दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित आदि)
- पढ़ा रहे शिक्षक कई बार NCTE और RCI के मानदंडों पर खरे नहीं
- सुप्रीम कोर्ट की भावना और बच्चों के अधिकारों की खुली अवहेलना
अब सवाल ये है:
- क्या दिव्यांग बच्चों का भविष्य ऐसे हाथों में सौंपा जा सकता है?
- कोर्ट के आदेशों की ऐसी अनदेखी पर जवाबदेही तय होगी?
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