इंदिरा गांधी ने युद्धविराम (ceasefire) को लेकर अमेरिका को जो जवाब दिया, वह भारतीय कूटनीति और नेतृत्व का एक ऐतिहासिक उदाहरण माना जाता है। यह बात 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान की है।
प्रसंग: अमेरिका का दबाव युद्धविराम के लिए
जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक युद्ध शुरू किया और बांग्लादेश की स्वतंत्रता करीब थी, तब अमेरिका बौखला गया। राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और सलाहकार हेनरी किसिंजर ने भारत पर दबाव बनाना शुरू किया कि वह युद्धविराम स्वीकार करे।
अमेरिका ने अपना 7वां बेड़ा (7th Fleet) बंगाल की खाड़ी में भेजा – एक प्रकार की सैन्य धमकी। अमेरिका चाहता था कि भारत रुक जाए ताकि पाकिस्तान को पूरी तरह हारने से बचाया जा सके।
इंदिरा गांधी का ऐतिहासिक जवाब:
जब अमेरिका की ओर से दबाव डाला गया, तब इंदिरा गांधी ने बहुत ही सटीक और तीखे शब्दों में कहा:
“हम कोई युद्धविराम तब तक नहीं करेंगे जब तक बांग्लादेश की जनता को न्याय नहीं मिल जाता और पाकिस्तानी सेना आत्मसमर्पण नहीं कर देती।”
उन्होंने यह भी कहा:
“हम जानते हैं अमेरिका की ताकत क्या है, पर हम अपने पड़ोसियों की आज़ादी के लिए पीछे नहीं हटेंगे।”
परिणाम:
- इंदिरा गांधी की दृढ़ता के कारण भारत ने युद्ध जारी रखा।
- 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया।
- बांग्लादेश एक नया स्वतंत्र देश बना।
- अमेरिका का दवाब नाकाम रहा, और भारत की साख दुनिया में और बढ़ गई।
