देखे हुआ था ,1971 के युद्ध में अमेरिका और इंदिरा गांधी के बीच युद्धविराम पर वार्ता  में


: “जवाब एक लौह नारी का”

(1971, नई दिल्ली – प्रधानमंत्री कार्यालय)

अधिकारी:
(तेज़ी से दौड़ता हुआ आता है)
“मैडम प्रधानमंत्री! अमेरिका ने 7वां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में भेज दिया है… राष्ट्रपति निक्सन का संदेश है — ‘भारत तुरंत युद्धविराम करे!'”

[कमरा शांत हो जाता है, सभी मंत्रियों के चेहरे पर तनाव]

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इंदिरा गांधी:
(धीरे-धीरे उठती हैं, हाथ में चाय का प्याला लिए)
“क्या उन्होंने यह संदेश पाकिस्तान को भेजा था जब वे लाखों निर्दोषों को मार रहे थे?”

अधिकारी:
“नहीं, मैडम… उन्होंने तो तब भी हमें संयम रखने को कहा था…”

इंदिरा गांधी:
(आँखों में तीव्रता, स्वर में लोहा)
“तो अब सुन लो…
हम कोई युद्धविराम तब तक नहीं करेंगे,
जब तक ढाका में अत्याचार का सूरज नहीं डूब जाता।
जब तक बांग्लादेश के बच्चे खुले आसमान में साँस न ले सकें।
और जब तक जनरल नियाज़ी हथियार डाल न दे!”

[सभी चुप। सिर्फ इंदिरा की आवाज़ गूंजती है]

इंदिरा गांधी:
“अमेरिका को बता दो –
भारत डरने वालों में से नहीं है।
हमें शांति चाहिए, पर घुटनों पर नहीं –
सीने पर तिरंगा लिए!”


“16 दिसंबर 1971 – पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया। बांग्लादेश बना स्वतंत्र राष्ट्र।”


इंदिरा गांधी ने युद्धविराम (ceasefire) को लेकर अमेरिका को जो जवाब दिया, वह भारतीय कूटनीति और नेतृत्व का एक ऐतिहासिक उदाहरण माना जाता है। यह बात 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान की है।


: अमेरिका का दबाव युद्धविराम के लिए

जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक युद्ध शुरू किया और बांग्लादेश की स्वतंत्रता करीब थी, तब अमेरिका बौखला गया। राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और सलाहकार हेनरी किसिंजर ने भारत पर दबाव बनाना शुरू किया कि वह युद्धविराम स्वीकार करे।

अमेरिका ने अपना 7वां बेड़ा (7th Fleet) बंगाल की खाड़ी में भेजा – एक प्रकार की सैन्य धमकी। अमेरिका चाहता था कि भारत रुक जाए ताकि पाकिस्तान को पूरी तरह हारने से बचाया जा सके।


इंदिरा गांधी का ऐतिहासिक जवाब:

जब अमेरिका की ओर से दबाव डाला गया, तब इंदिरा गांधी ने बहुत ही सटीक और तीखे शब्दों में कहा:

“हम कोई युद्धविराम तब तक नहीं करेंगे जब तक बांग्लादेश की जनता को न्याय नहीं मिल जाता और पाकिस्तानी सेना आत्मसमर्पण नहीं कर देती।”

उन्होंने यह भी कहा:

“हम जानते हैं अमेरिका की ताकत क्या है, पर हम अपने पड़ोसियों की आज़ादी के लिए पीछे नहीं हटेंगे।”


परिणाम:

  • इंदिरा गांधी की दृढ़ता के कारण भारत ने युद्ध जारी रखा।
  • 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया।
  • बांग्लादेश एक नया स्वतंत्र देश बना।
  • अमेरिका का दवाब नाकाम रहा, और भारत की साख दुनिया में और बढ़ गई।

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