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RTE में सख्ती: बिना APAAR ID अब नहीं मिलेगी फीस प्रतिपूर्ति, निजी स्कूलों पर बढ़ी निगरानी
लखनऊ।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हो रहे दाखिलों को पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। अब निजी स्कूलों में RTE के तहत एडमिशन लेने वाले छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति तभी होगी, जब उनकी APAAR ID बनी होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से निजी स्कूलों में अपार ID बनाने में हो रही हीलाहवाली पर रोक लगेगी और छात्रों का सटीक डेटा भी उपलब्ध होगा।
क्या है APAAR ID और क्यों है ज़रूरी?
APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) एक यूनिक अकादमिक पहचान संख्या है, जिसे NEP 2020 के तहत पूरे भारत में लागू किया जा रहा है। यह छात्र की पूरी शैक्षणिक यात्रा को एक डिजिटल पहचान में दर्ज करता है।
RTE दाखिलों में APAAR ID का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि:
- अब शुल्क प्रतिपूर्ति सिर्फ उन्हीं छात्रों की होगी जिनकी APAAR ID बनी होगी।
- यह ID UDISE नंबर और RTE नंबर से लिंक की जाएगी, जिससे हर छात्र की पहचान एकीकृत हो जाएगी।
- सरकार को यह ट्रैक करने में आसानी होगी कि छात्र नियमित स्कूल आ रहे हैं या नहीं।
निजी स्कूलों में अब तक कम सफलता
जहां सरकारी स्कूलों में 90% से ज्यादा छात्रों की APAAR ID बन चुकी है, वहीं निजी स्कूलों में यह आंकड़ा अभी भी 50-60% के बीच है। कई बार कैंप और निर्देशों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिससे अब सख्ती शुरू की गई है।
हर दिन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी उपस्थिति
बेसिक शिक्षा विभाग ने RTE छात्रों के लिए एक स्पेशल पोर्टल विकसित किया है।
- सभी निजी स्कूलों को लॉगिन ID-पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं।
- प्रत्येक दिन RTE छात्रों की उपस्थिति इस पोर्टल पर अपलोड करनी अनिवार्य होगी।
- इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि छात्र प्रवेश लेने के बाद वास्तव में स्कूल जा रहे हैं।
औचक निरीक्षण भी होंगे
समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि विभाग के अधिकारी अब निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण भी करेंगे।
“कई बार शिकायत मिलती है कि RTE में दाखिले के बाद बच्चों को स्कूल से हटा दिया जाता है। अब इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी,” – डॉ. सिंह
नए सत्र 2025-26 में क्या बदलेगा?
- UDISE, RTE और APAAR ID को आपस में जोड़ा जाएगा।
- जिन बच्चों की ID लिंक नहीं होगी, उनकी शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी।
- सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द सभी छात्रों की APAAR ID बनवाएं और पोर्टल पर अपडेट करें।
निष्कर्ष: शिक्षा में पारदर्शिता की दिशा में मजबूत कदम
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय न केवल शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा, बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा में भी मील का पत्थर साबित होगा। निजी स्कूलों को चाहिए कि वे समय रहते आवश्यक डेटा अपलोड करें और सरकार की नीति के अनुरूप कार्य करें।
आपकी राय?
क्या आप मानते हैं कि APAAR ID से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी? नीचे कमेंट में जरूर बताएं।
