इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पिता के नाम जमीन होने पर भी बेटा भूमि पट्टे का हकदार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि पट्टा से जुड़े एक अहम मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्रभुदयाल मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पिता के नाम पर जमीन दर्ज है, तो भी बेटा सरकारी पट्टे का लाभ प्राप्त कर सकता है।
यह फैसला न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय की एकल पीठ ने ललितपुर जिले के खिरिया छतारा गांव निवासी सुमेर सिंह की याचिका पर सुनाया।
भूमि पट्टा निरस्तीकरण के आदेश रद्द
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड के 12 नवंबर 1992 और अपर जिलाधिकारी के 16 अक्टूबर 1982 को दिए गए पट्टा निरस्तीकरण के आदेशों को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। साथ ही याचियों का नाम भूलेखों में तत्काल दर्ज करने का निर्देश दिया।
सीएलआरडी योजना के तहत मिला था पट्टा
सुमेर सिंह और अन्य याचियों को 1959 में उत्तर प्रदेश सरकार की सीएलआरडी योजना के तहत भूमि का पट्टा आवंटित किया गया था। याचियों ने लगातार 20 वर्षों तक उस जमीन पर कब्जा बनाए रखा और इस दौरान किसी भी व्यक्ति ने कोई आपत्ति नहीं की।
1979 में स्वतः संज्ञान लेकर निरस्त कर दिया गया पट्टा
साल 1979 में जिला प्रशासन ने स्वतः संज्ञान लेकर यह कहकर पट्टा रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता भूमिहीन नहीं हैं, क्योंकि उनके पिता के नाम पर पहले से जमीन दर्ज है।
ट्रायल कोर्ट और राजस्व परिषद से कोई राहत न मिलने पर याचियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि याचियों को कानूनी रूप से पट्टा आवंटित किया गया था और बिना सुनवाई के पट्टा निरस्त करना कानूनन गलत है।
एसजीएसटी अधिकारी पर कोर्ट सख्त: ₹20,000 जुर्माना
हाईकोर्ट ने एसजीएसटी अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अधिकारी न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे पीड़ितों को सुनवाई का अवसर दिए बिना कर या दंड का निर्धारण कर रहे हैं।
कोर्ट ने गाजियाबाद के एसजीएसटी ज्वाइंट कमिश्नर द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए ₹20,000 का जुर्माना लगाया। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मेरिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
कंपनी आलू फ्लेक्स उत्पादक है और अधिकारी ने गलत वर्गीकरण करते हुए ₹5.5 करोड़ का कर निर्धारण कर दिया था।
आंबेडकर जयंती शोभायात्रा पर भी हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर शोभायात्रा निकालने की अनुमति को लेकर बागपत निवासी हरबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि 26 अप्रैल तक याचिका पर निर्णय लें।
यदि 24 अप्रैल को याची द्वारा आवेदन और वेबसाइट से आदेश की कॉपी प्रस्तुत की जाती है, तो 26 अप्रैल तक निर्णय लिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की पीठ ने दिया।
निष्कर्ष
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं के तहत दिए गए पट्टों को केवल पूर्वजों की संपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। साथ ही, अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, वरना उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
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