अब स्कूलों में सिखाई जाएगी “ना” कहने की कला – यूपी के 6972 विद्यालयों में शुरू हुआ नया संचार कौशल कार्यक्रम

अब स्कूलों में सिखाई जाएगी “ना” कहने की कला – यूपी के 6972 विद्यालयों में शुरू हुआ नया संचार कौशल कार्यक्रम


“ना” कहना भी है एक कला – यूपी के छात्रों को अब मिलेगा संचार कौशल का प्रशिक्षण

अब उत्तर प्रदेश के 4,512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों और 2,460 राजकीय विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को सिर्फ विषयों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि “ना” कहना भी सिखाया जाएगा।

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मनोविज्ञानशाला एवं निर्देशन विभाग द्वारा तैयार की गई इस विशेष पहल में अब शिक्षक विद्यार्थियों को संचार कौशल संवर्द्धन (Communication Skills Enhancement) का प्रशिक्षण देंगे।


क्या है ये नया कार्यक्रम?

मनोविज्ञानशाला की निदेशक ऊषा चन्द्रा के अनुसार:

स्पष्टता बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जरूरी है कि छात्र यह समझें कि कब और कैसे ‘ना’ कहना है।

इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ अपनी सीमाएं तय कर सकें और दबाव में आकर कोई गलत निर्णय न लें।


क्या-क्या सिखाया जाएगा छात्रों को?

नए सत्र से शिक्षक इन प्रमुख बातों पर ध्यान देंगे:

कब “ना” कहना जरूरी होता है?

  • जब आप असहज महसूस करते हैं।
  • जब आप पर अत्यधिक दबाव हो।
  • जब कोई अनुरोध आपकी सीमाओं को पार करता है।
  • जब आप केवल दूसरों को खुश करने के लिए हां कह रहे हों।
  • जब कोई बात आपको गिल्ट या जबरदस्ती महसूस कराए।

कैसे कहें “ना” – विनम्रता के साथ प्रभावी संचार

  • तार्किक कारण बताएं।
  • संक्षिप्त और स्पष्ट रहें।
  • धन्यवाद कहें लेकिन सहमत न हों।
  • कोई विकल्प सुझाएं।
  • अपने उत्तर पर दृढ़ रहें।
  • यदि जरूरी हो तो नकारात्मक प्रभाव की व्याख्या करें।

अन्य कौशल जो सिखाए जाएंगे:

  • कैसे करें अभिवादन।
  • स्वयं और दूसरों का परिचय कैसे दें।
  • प्रभावी श्रवण (Listening) और अभिव्यक्ति (Expression) कैसे करें।
  • सांस्कृतिक, भाषाई व सूचना अवरोधों से निपटना।
  • प्रतिपुष्टि (Feedback) को समझना और देना।

क्या है योजना का उद्देश्य?

इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य है कि छात्र
अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ रखें, दबाव में न आएं और मानसिक रूप से मजबूत बनें।


निष्कर्ष:

“ना” कहना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यह एक ऐसा कौशल है, जो व्यक्ति को अपने आत्म-सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना सिखाता है। यूपी बोर्ड की यह पहल निश्चित रूप से छात्रों के व्यक्तित्व विकास और व्यवहारिक दक्षताओं को नई दिशा देगी।

क्या आपको लगता है ऐसी स्किल्स पहले से स्कूलों में सिखाई जानी चाहिए थीं? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें!

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